Visit of Baichung Bhutia, known as Tarch Bearer of Indian football team
December 15, 2017

भारतीय फुटबाल टीम के टार्च बियरर के नाम से जाने जाते बाइचुंग भूटिया का सफ़र

15 दिसंबर 1976 को जन्मे बाइचुंग भूटिया ने अर्जुन पुरस्कार जीत कर सभी प्रशंसकों की बीच अपनी जगह बना ली है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल क्षेत्र में भारतीय फुटबाल टीम के टार्च बियरर के नाम से जाने जाते है. उनका फुटबाल खेलने का अलग ही अंदाज होता है. वह हर प्रकार की स्ट्राइक करने की क्षमता रखते है. फुटबॉल में उनकी शूटिंग कौशल की वजह से उन्हें अक्सर सिक्किमी स्निपर नाम दिया जाता है. सुप्रसिद्ध भारतीय खिलाड़ी आइ॰ एम॰ विजयन ने भूटिया को भारतीय फुटबॉल के लिए भगवान का उपहार बताया है.

बाइचुंग भूटिया :

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बाइचुंग भूटिया का जन्म 15 दिसंबर 1976 को सिक्किम के तिनकिताम में हुआ था. उनके माता-पिता किसान थे, माता-पिता को शुरू में उनका खेलना पसन्द नहीं था. उनके पिता की मृत्यु होने के बाद उनके चाचा, कर्म भूटिया से प्रोत्साहन के बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स स्कूल, पाकजोंग, ईस्ट सिक्किम में अपनी शिक्षा प्राप्त करी.

नौ साल की उम्र :

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उन्होंने नौ साल की उम्र में गंगटोक में तशी नामग्याल अकादमी में भाग लिया और भारतीय खेल से एक फुटबॉल छात्रवृत्ति जीती. फुटबॉल के अलावा, भूटिया ने भी अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व बैडमिंटन, बास्केटबॉल और एथलेटिक्स में किया हैं उन्होंने अपने गृह राज्य सिक्किम में कई स्कूलों और स्थानीय क्लबों के लिए खेलना शुरू कर दिया था.

बेस्ट प्लेयर :

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1992 के सुब्रोतो कप में भूटिया जी ने बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया था. इस प्रदर्शन को देखते हुआ उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिला और उन्होंने बेस्ट प्लेयर पुरस्कार भी प्राप्त किया. इसे देखकर पूर्व भारत के गोलकीपर भास्कर गांगुली ने उनकी प्रतिभा देखी और उन्हें कोलकत्ता फुटबॉल में शामिल होने में मदद की. फुटबॉल में उनकी शूटिंग कौशल की वजह से उन्हें अक्सर सिक्किमी स्निपर नाम दिया गया है.

विख्याखत फुटबॉलर : 

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बाइचुंग भूटिया ने अपनी स्कूाली शिक्षा को छोड़ कर अपनी फ़ुटबाल की अच्छी व्यावसायिक ट्रेनिंग के लिए ईस्ट इंडिया क्लब में शामिल हो गए. उन्होंने लगभग तीन साल विदेशी क्लबों के लिए खेलने के बाद भूटिया भारत लौट आए और 1995 में बाइचुंग ने जे.सी.टी. मिल्स, फगवाड़ा की टीम में शामिल होने का फैसला लिया.

इस टीम ने राष्ट्रीय फुटबाल लीग मैच जीत हासिल करी और बाइचुंग ने इस लीग मैच में सबसे बड़ा स्कोर रहा था. इसके बाद वे भारतीय फुटबॉल टीम के सबसे विख्याखत फुटबॉलर बन गए और उनका चयन नेहरू कप में खेलने के लिए भी आसानी से हो गया. सुप्रसिद्ध भारतीय खिलाड़ी आइ॰ एम॰ विजयन ने भूटिया को भारतीय फुटबॉल के लिए भगवान का उपहार बताया गया है.

अर्जुन पुरस्कार : 

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1998-99 के सत्र में बाइचुंग भूटिया टीम के कप्तान भी बने थे, जिसके दौरान ईस्ट बंगाल लीग में सलगावकर के बाद दूसरे स्थान पर रहा इसके अलावा उन्हें 1999 में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त करने वाले 19वीं फुटबालर बने, जो भारत सरकार राष्ट्रिय खेलों में उत्कृष्ट उपलब्धियों हासिल करने वाले एथलीटों को दिया जाता हैं.

नेशनल फुटबॉल लीग का प्लेयर से सम्मानित : 

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भूटिया जी ने पूर्वी बंगाल के लिए 2005-06 के सीजन के अंत तक खेलना जरी रखा. अंतिम सत्र में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने उन्हें एक सत्र में नेशनल फुटबॉल लीग का प्लेयर से सम्मानित किया, जिसमें उन्होंने 12 गोल किए. तब भी वह ईस्ट बंगाल लीग में उपविजेता ही रहे.

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