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April 27, 2018

सड़क पर अचार बेचने वाली महिला कैसे बनी करोड़ों की मालकिन जानिए उनकी सफलता का कारण

अकसर कहा जाता है कि संघर्ष ही इंसान को सफल बनाता है, ये बात बिलकुल सच है. कई लोगों को पर्याप्त पैसे, संसाधन और शिक्षा के बाद भी सफलता नहीं मिलती है. वहीं कुछ लोग अपनी कड़ी मेहनत और लगन से पैसे, संसाधन के अभाव में भी सफलता की सीढ़िया चढ़ ही लेते हैं. इसका जीता जागता उदाहण है बुलंदशहर की कृष्णा यादव, जो आज ‘श्री कृष्णा पिकल्स’ की मालकिन हैं और दिल्ली के नजफगढ़ में रहती हैं और वो एक सफल खाद्य प्रसंस्करण उद्यमी हैं. उन्हें ये सफलता इतनी आसानी से नहीं मिली है, इसके लिए उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पाड़ा, ज़िन्दगी में कई उतार चढ़ाव आए, तब जाकर वो आज इस मुकाम पर हैं.

रेहड़ी से लेकर करोड़ो की मालकिन बनने का सफर

दरअसल, कृष्णा यादव उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली हैं. साल 1995-96 में उनके पति गाड़ी चलाते थे, फिर उन्होने काम बढ़ाने के लिये ट्रांसपोर्ट का बिजनेस शुरू किया, जो नहीं चल पाया और कृष्णा का परिवार कर्ज में डूब गया. कर्ज चुकाने के लिए उन्होने अपना घगर तक बेच दिया. जब उनके बेरोजगार पति गोवर्धन यादव मानसिक रूप से बेहद परेशान हालात में फंस चुके थे. लेकिन ये उनकी दृढ़ता और साहस ही था कि जिसने उनके परिवार को इस कठिन दौर को सहने की ताकत दी, और फिर उन्होंने अपने एक मित्र से 500 रुपया उधार लेकर परिवार के साथ दिल्ली आने का फैसला किया. उन्होने अपने पति के साथ दिल्ली की सड़कों पर 3महीने रोजगार की तलाश की, लेकिन कोई रोजगार नहीं मिला.

काफी जद्दोजहद के बाद भी उन्हें कोई काम नहीं मिल पाया, अंत में मजबूरन उन्होंने कमांडेट बीएस त्यागी के खानपुर स्थित रेवलाला गांव के फार्म हाउस के देख-रेख की नौकरी शुरू की. कमांडेट त्यागी के फार्म हाउस में वैज्ञानिकों के निर्देशन में बेर और करौंदे के बाग लगाए गए थे. उस वक्त बाजार में इन फलों की अच्छी कीमत मिलती थी, इसलिए वैज्ञानिकों ने कमांडेट त्यागी को मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण तकनीक से अवगत कराया. फार्म हाउस में काम करते-करते कृष्णा को भी खेती से बेहद लगाव होता चला गया.

 

कभी रेहड़ी लगाकर बेचती थी अचार

इसके लिये उन्होने पूसा संस्थान से फूड प्रोसेसिंग में तीन महीने की ट्रेनिंग ली और और अपने घर से ही अचार बनाने का काम शुरू किया. पहले दिन इन्होने सिर्फ 5किलो अचार बनाया, फिर उनके सामने दिक्कत ये थी की उसको बेचा कैसे जाये, उन्होंने अपने पति को दुकानों पर भेजा, लेकिन कोई भी खुला अचार खरीदने की लिए तैयार नहीं था.
फिर कृष्णा यादव ने सड़क किनारे मेज लगाकर अचार बेचना शुरू किया, बहुत लोगों ने उनकी हंसी भी की, लेकिन उन्होने एक न सुनी. और धीरे-धीरे उनका अचार बिकने लगा जो उनका अचार एक बार ले जाता दुबारा वहीं अचार की डिमांड करता.

करोड़ों का है टर्नओवर

एक समय ऐसा आया कि उनेक अचार की डिमांड मार्केट में काफी बढ़ गयी. फिर फैक्ट्री की जरूरत होने लगी. उन्होने दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में फैक्ट्री लगाई. देखते ही देखते कृष्णा यादव आज 4कंपनियों की मालकिन हैं. अब इनका टर्नओवर करोड़ों में है, रेहड़ी की जगह गाड़ी ने ले ली है, और फैक्ट्री की बाहर दुकान से भी ये लोग अचार बेचते हैं.
आज श्रीमती कृष्णा यादव ‘श्री कृष्णा पिकल्स’ ब्रांड के बैनर तले कई तरह की चटनी, अचार, मुरब्बा समेत कुल 87 प्रकार के उत्पाद तैयार करती हैं. आपको यह जानकर हैरानी होगी की आज इनके व्यापार में करीबन 500 क्वींटल फलों और सब्जियों का प्रयोग होता है, जिसकी कीमत करोड़ों में है. हाल ही में कृष्णा ने अपने बिज़नेस का विस्तार पेय-पदार्थ जैसे उत्पादों में भी किया है.

कृष्णा यादव को अब तक मिल चुके हैं कई अवार्ड

कृष्णा यादव को 8 मार्च 2016 को भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से दिए जाने वाले नारी शक्ति सम्मान 2015 के लिए चुना गया. वहीं साल 2014 में हरियाणा सरकार ने कृष्णाच यादव को इनोवेटिव आइडिया के लिए राज्य की पहली चैंपियन किसान महिला अवार्ड से सम्मानित किया था. इससे पहले उन्हें सितंबर 2013 में वाइब्रंट गुजरात सम्मेलन में उस वक्त वहां के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी उन्हें किसान सम्मान के रूप में 51 हजार रुपए का चेक दिया था. इस पहले 2010 में राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने भी एक कार्यक्रम के तहत कृष्णा यादव को बुलाकर उनकी सफलता की कहानी सुनी थी.

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