Satpal Maharaj Biography
July 3, 2021

Satpal Maharaj Biography – राजनेता नहीं बल्कि धर्मगुरु भी है सतपाल महाराज, बेटे की शाही शादी को लेकर हुई थी चर्चा

Satpal Maharaj Biography – दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम सतपाल महाराज के बारे में बात करेंगे. सतपाल महाराज उत्तराखंड की सरकार में मंत्री है. सतपाल महाराज उत्तराखंड में भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक है. सतपाल महाराज एक राजनेता होने के साथ-साथ एक धर्म गुरु भी है. उनके लाखो अनुयायी है जो उनकी पूजा तक करते हैं. सतपाल महाराज उत्तराखंड के बाहर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में अपने भक्तों को प्रवचन भी देने जाते है.

इन सब के अलावा सतपाल महाराज के बेटे की शादी के दौरान हुए खर्च को लेकर भी वह सुर्ख़ियों में रहे हैं. तो चलिए दोस्तों इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि सतपाल महाराज कौन है?, सतपाल महाराज की पत्नी और सतपाल महाराज के परिवार के बारे में?, साथ ही जानेंगे उनके अब तक के राजनीतिक सफ़र के बारे में. तो शुरू करते है सतपाल महाराज का जीवन परिचय.

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सतपाल महाराज जीवनी (Satpal Maharaj Biography)

सतपाल महाराज का जन्म 21 सितंबर 1951 को उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में स्थित कनखल में हुआ था. सतपाल महाराज का असली नाम सतपाल सिंह रावत है. सतपाल महाराज के पिता (Satpal Maharaj Father) प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु योगीराज परमंत श्री हंस थे. सतपाल महाराज की माता का नाम जगत जननी राजेश्वरी देवी है. सतपाल महाराज के एक भाई भी हैं, जिनका नाम प्रेम रावत है.

सतपाल महाराज का राजनीतिक जीवन (Satpal Maharaj Political Life)

सतपाल महाराज ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 90 के दशक में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की थी. साल 1991 में सतपाल महाराज उत्तरप्रदेश कांग्रेस समिति के सदस्य बन गए थे. साल 1992 में अब पूरे देश का माहौल ख़राब हो गया था तब सतपाल महाराज को राष्ट्रीय राहत और सद्भावना समिति का सदस्य बनाया गया था. इसके बाद सतपाल महाराज साल 1994 में अलग उत्तराखंड राज्य बनाने के लिए बनी उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष परिषद के सदस्य भी बने.

उत्तराखंड राज्य की स्थापना (Uttarakhand State Establishment)

साल 1996 में सतपाल महाराज पौंडी से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने. सतपाल महाराज की अलग उत्तराखंड राज्य बनाने में अग्रणी भूमिका रही है. एक सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा और आई.के. गुजराल और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु पर उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने के लिए दबाव डाला था. उनके प्रयासों का ही नतीजा था कि प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने 15 अगस्त 1996 को लालकिले की प्राचीर से अलग उत्तराखंड राज्य बनाने की घोषणा की.

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केन्द्रीय मंत्री की भूमिका (Central Minister)

सतपाल महाराज ने साल 1996 से 1997 तक संयुक्त मोर्चे की सरकार में केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मंत्री बने. इसके बाद सतपाल महाराज ने साल 1997 से 1998 तक वित्त राज्यमंत्री का पद भी संभाला.

उत्तराखंड की राजनीति में वापसी (Uttarakhand politics)

साल 2000 में अलग उत्तराखंड राज्य की स्थापना हुई. इसके बाद सतपाल महाराज केंद्र की राजनीति छोड़ राज्य की राजनीति में आ गए. इसी साल सतपाल महाराज को उत्तराखंड से ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी का सदस्य चुना गया. सतपाल महाराज साल 2002 से साल 2004 तक कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव भी रहे है.

यूनाइटेड नेशन में दिया भाषण (speech in United Nation)

साल 2008 में कांग्रेस ने सतपाल महाराज को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का प्रभारी भी नियुक्त किया था. साल 2009 में सतपाल महाराज एक बार फिर सांसद बने और डिफेंस स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन बने. सतपाल महाराज ने साल 2011 में यूनाइटेड नेशन महासभा को संबोधित किया था.

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कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए (Satpal Maharaj left Congress and joined BJP)

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से नाराजगी के चलते सतपाल महाराज ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और साल 2014 में भाजपा में शामिल हो गए. सतपाल महाराज ने साल 2017 में उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनाव में चौबट्टाखल निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीतकर पहली बार सांसद बने. सतपाल महाराज सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं.

सतपाल महाराज का आध्यात्मिक जीवन (Satpal Maharaj Spiritual Life)

सतपाल महाराज के पिता हंस राज एक प्रसिद्द धार्मिक गुरु थे. अपने पिता के आचरणों का असर सतपाल महाराज पर भी पड़ा. साल 1970 में सतपाल महाराज ने अपने पिता की विरासत संभाली. साल 1996 में सतपाल महाराज के पिता का निधन हो गया. सतपाल महाराज अपने भक्तों को प्रवचन भी देते है.

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सतपाल महाराज की पत्नी (Satpal Maharaj wife)

सतपाल महाराज की पत्नी का नाम अमृता रावत है. 8 फरवरी 1981 को सतपाल महाराज और अमृता रावत की शादी हुई थी. अमृता रावत भी राजनीति में है. अमृता रावत तीन बार विधायक रह चुकी है. इसके अलावा अमृता रावत उत्तराखंड सरकार में मंत्री भी रही है. हालाँकि साल 2014 में अब सतपाल महाराज भाजपा में शामिल हुए तो तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें मंत्री पद से हटा दिया. अमृता रावत ने साल 2017 में चुनाव नहीं लड़ा. सतपाल महाराज और अमृता रावत के दो बेटे है. सतपाल महाराज के बेटों (Satpal Maharaj sons) के नाम सुयश महाराज और श्रद्धेय महाराज है.

सतपाल महाराज के बेटे की शादी (Satpal Maharaj son marriage)

साल 2012 में सतपाल महाराज के बेटे श्रद्धेय महाराज की शादी हुई थी. इस शाही शादी की काफी चर्चा हुई थी. श्रद्धेय की शादी में डेढ़ लाख से अधिक लोग जुटे थे. शादी इतनी भव्य थी कि महज लाइटिंग पर ही एक करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुआ था. शादी के शाही व्यंजन बनाने में तकरीबन 400 सिलेंडर लिए गए थे. सतपाल महाराज की बहू का नाम मोहिना कुमारी है. मोहिना कुमारी एक एक्ट्रेस है.

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सतपाल महाराज की संपत्ति (Satpal Maharaj Property)

सतपाल महाराज उत्तराखंड के सबसे अमीर विधायकों में से एक है. सतपाल महाराज की सम्पत्ति तकरीबन 80 करोड़ से ज्यादा मूल्य की है. सतपाल महाराज के पास 73 की करोड़ अचल और 6 करोड़ की चल संपत्ति है.

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