September 1, 2020

Pranab Mukherjee Biography- राजीव गांधी से अनबन के बाद प्रणब मुखर्जी ने बनाई थी अलग पार्टी

Pranab Mukherjee Biography in Hindi –

31 अगस्त 2020 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (13th President of India Pranab Mukherjee) का निधन हो गया है। इसकी जानकारी उनके सुपुत्र अभिजीत मुखर्जी (Abhijit Mukherjee) द्वारा ट्वीट के माध्यम से दी गई है। प्रणब मुखर्जी भारत के सबसे सम्माननीय व्यक्तियों में से एक थे। हम पूरे सम्मान के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। तप आइए प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) के राजनीतिक सफर पर एक नज़र डालते हैं।

प्रणब मुखर्जी का जन्म और परिवार :- प्रणब मुखर्जी का जन्म (Pranab Mukherjee DOB) 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के गांव मिराती में हुआ था। उनके पिताजी कामदा किंकर मुखर्जी भारत की आजादी के आंदोलन में सक्रिय थे तथा बाद में पश्चिम बंगाल विधान सभा के सदस्य भी रहे। उनकी माताजी का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी था। प्रणब मुखर्जी की एक बड़ी बहन तथा एक छोटा भाई है। उनकी बड़ी बहन का नाम अन्नपूर्णा मुखर्जी तथा छोटे भाई का नाम पीयूष मुखर्जी है।

प्रणब मुखर्जी की शिक्षा और करियर:- प्रणब मुखर्जी ने अपनी एमए राजनीति शास्त्र और इतिहास विषय के साथ कलकत्ता विश्वविद्यालय से की थी तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय से ही एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 1957 में उनकी शादी शुभ्रा मुखर्जी से हुई। उनकी तीन संतानें हैं एक पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी तथा दो पुत्र अभिजीत मुखर्जी और इंद्रजीत मुखर्जी। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने अपर डिवीजन क्लर्क के रूप में कार्य किया। इसके बाद वर्ष 1963 में उन्होंने विद्यानगर कॉलेज कलकत्ता को राजनीति शास्त्र के सहायक प्रोफेसर के पद पर ज्वाइन कर लिया। राजनीति में आने से पूर्व उन्होंने देशेर डाक नामक बांग्ला प्रकाशन संस्थान के साथ एक पत्रकार के रूप में कार्य किया।

प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक करियर (Pranab Mukherjee political career) – उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत वर्ष 1969 में हुई जब मोदिनीपुर उपचुनाव के लिए किए गए उनके सफल अभियान से प्रभावित होकर तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें कांग्रेस पार्टी का सदस्य बना लिया। इसके बाद इंदिरा गांधी की मदद से जुलाई 1969 में वे राज्य सभा के सदस्य बने। जल्द ही वे इंदिरा गांधी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक बन गए। इसी के चलते इंदिरा गांधी ने उन्हें वर्ष 1982 में वित्त मंत्री बनाया। लेकिन इंदिरा गांधी के निधन के बाद प्रणब मुखर्जी की कांग्रेस से दूरी बन गई। राजीव गांधी के कार्यकाल में उन्हें कांग्रेस की तरफ से कोई विशेष सहायता नहीं मिली क्योंकि उनके अनुसार प्रधानमंत्री पद का दावेदार राजीव गांधी को नहीं बल्कि पार्टी के किसी वरिष्ठ मंत्री को होना चाहिए था। माना जाता है कि वे उस समय खुद को भी प्रधानमंत्री पद का दावेदार मान रहे थे। हालांकि।

राजीव गांधी कार्यकाल में कमरे से अनबन के चलते प्रणब मुखर्जी कमरे से अलग हो गए और वर्ष 1986 में खुद के राजनीतिक दल राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस की स्थापना की। प्रणब मुखर्जी की पार्टी ने पश्चिम बंगाल में 1987 के विधान सभा चुनावों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। हालांकि राजीव गांधी के साथ समझौता होने के बाद वर्ष 1989 में उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया। वह 1991 में राजीव गांधी के निधन के बाद जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने तो प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक करियर पुनर्जीवित हो उठा। नरसिम्हा राव ने उन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष बनाया तथा बाद में वे केन्द्र में कैबिनेट मंत्री बने। वर्ष 1995-96 में उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया।

मुखर्जी को गांधी परिवार का वफादार माना जाता था और उन्होंने सोनिया गांधी के राजनीति प्रवेश में मुख्य रूप से सहायता की। फलस्वरूप मुखर्जी को वर्ष 1998-99 में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाया गया। वहीं वर्ष 2000 से 2010 तक वे पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहे। इस बीच उन्होंने 2004 से 2006 तक रक्षा मंत्री और 2006 से 2009 तक विदेश मंत्री का कार्यभार संभाला। वर्ष 2009 में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। इस पद पर वे वर्ष 2012 तक रहे। इसके बाद उनका नाम यूपीए की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया गया। 25 जुलाई 2012 को उन्होंने भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की तथा देश के पहले बंगाली राष्ट्रपति बने।

प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। वर्ष 2019 में प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 10 अगस्त 2020 को मुखर्जी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि उन्होंने अपने मस्तिष्क में रक्त के थक्के को हटाने के लिए अपनी सर्जरी से पहले कोरोना टेस्ट करवाया है तथा वे कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। ब्रेन सर्जरी संबंधी आगे की प्रक्रिया के लिए उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया लेकिन अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते उनकी हालत दिन ब दिन बिगड़ती चली गई। 31 अगस्त 2020 को 84 वर्ष की आयु में प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया और उनके साथ ही राजनीति के एक युग का अंत हो गया।

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