पिनाराई विजयन केरल के मुख्यमंत्री (Pinarayi Vijayan Chief Minister) होने के साथ ही एक कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में भी हमेशा से अपनी पहचान दर्ज करवाते आए हैं. यही वजह है की हर 5 साल में अपनी सरकार को बदलने वाला राज्य फिर से एलडीएफ (Left Democratic Front) को भी अपनी कमान सौप रहा है. इन सबके पीछे एक वजह खुद सीएम पिनाराई विजयन (Chief Minister Pinarayi Vijayan) ही हैं.
विजयन ने अपने राज्य के काम को करते हुए हमेशा चतुराई और सुझबुझ का परिचय दिया है. चाहे बात प्रशासन में बदलाव की हो या पार्टी में वे अपने कहे पर खरा उतरे हैं. विजयन की पार्टी (pinarayi vijayan party) ने अपनी शुरुआत से ही लोगों के दिलों जगह बनाना शुरू कर दिया था जो कि हमें देखने को भी मिल रहा है.
तो चलिए जानते हैं आखिर कौन हैं पिनाराई विजयन? कैसा है उनका जीवन ? कैसा रहा पिनाराई विजयन का राजनितिक करियर ? इन सबके बारे में विस्तार से :
पिनाराई विजय का जन्म (Pinarayi Vijayan Date of Birth) ;
विजयन का जन्म 21 मार्च 1944 को कन्नूर जिले में हुआ था. विजयन जन्म से ही एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे. विजयन के पिता का नाम पाम वाइन और माता का नाम ताड़ी टेपार था. पिनाराई ने कमला से शादी की जिनसे उन्हें दो बच्चे भी हैं. विजयन की बेटी वीणा विजयन (Veena Vijayan) और बेटा विवेक विजयन (Vivek Vijayan). वीणा विजयन एक सॉफ्टवेर इंजिनियर हैं.

कैसे हुआ पिनाराई विजयन का राजनीती में प्रवेश :
विजयन पीला छात्र संघ के माध्यम से काफी एक्टिव थे, जिसके बाद उनका ध्यान राजनीती की ओर होने लगा और उन्होंने राजनीती में प्रवेश करने का मन बनाया. विजयन ने कम्युनिस्ट पार्टी का हाथ साल 1964 में थम लिया था. विजयन ने इसके बाद राष्ट्रपति और केरल संघ KSF सचिव और भी केरल राज्य फेडरेशन KSYF के अध्यक्ष के रूप में भी काफी काम किया जिसके चलते उनका नाम काफी सुर्ख़ियों में रहने लगा.
पिनाराई विजयन अपनी राजीतिक गतिविधियों और केरल में कम्युनिस्टों अलग छिपा के दौरान बहिष्कार के चलते कुछ समय जेल की हवा भी खा चुके हैं. इसके बाद ही उन्हें केरल राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में भी चुना गया था. इसके बाद पिनाराई साल 1977, साल 1991 और साल 1996 में फिर से चयनित किए गए और उन्होंने इस पद की गरिमा को बनाए रखा.

पिनाराई ने ई के था नयनार के मंत्रालय में साल 1996 से लेकर साल 1998 तक विद्युत् और सहकारी व्यग के मंत्री के रूप में भी काम किया था. जिसके बाद यह साल 1998 में भाकपा के रूप में तब्दील हो गया. पिनाराई को साल 2002 के दौरान सीपीआई में पोलित ब्यूरो के लिए चुना गया.
पिनाराई ने किया हमेशा अपनी पार्टी का विस्तार :
पिनाराई विजयन को हमेशा से ही अपनी पार्टी सीपीएम का आधार बढाते हुए देखा गया है. यह बात भी सभी जानते हैं कि केरल में सीपीएम (Communist Party of India (Marxist)) हमेशा से ही एक ‘हिंदू पार्टी’ के रूप में सामने आई है. हालांकि विजयन ने अपनी पार्टी की ‘हिन्दू पार्टी’ की छवि को भी बदला. और यह काम उन्होंने तब किया राजनीती एक अहम मोड़ ले रही थी. दरअसल विजयन ने Communist Party of India (Marxist) की ‘हिन्दू पार्टी’ की छवि को बदलते हुए मुस्लिम और ईसाई समाज के लोगों को पार्टी में जोड़ना शुरू किया जिससे लोगों को पार्टी पर विश्वास होने लगा.
