जब भी बिहार की राजनीति की राजनीति की बात होती है या फिर लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं का जिक्र होता है तो उसमें राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का नाम शामिल होता है. पप्पू यादव बिहार की राजनीति का एक बड़ा नाम है. पप्पू यादव की गिनती किसी भी लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं में होती थी. हालांकि फिर एक समय ऐसा भी आया जब लालू प्रसाद यादव की पार्टी ने पप्पू यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. तो चलिए आज के इस आर्टिकल हम जानते है कि पप्पू यादव का इतिहास:-
पप्पू यादव की जीवनी Biography of Pappu Yadav
पप्पू यादव का जन्म 24 दिसम्बर 1967 को हुआ था. पप्पू यादव का असली नाम राजेश रंजन है. पप्पू यादव के पिता का नाम चन्द्र नारायण प्रसाद यादव है. पप्पू यादव की माता का नाम शान्ति प्रिया है. पप्पू यादव की पत्नी का नाम रंजिता रंजन है. रंजीत रंजन कांग्रेस की पूर्व सांसद है. पप्पू यादव और रंजिता रंजन का एक बेटा सार्थक रंजन और एक बेटी प्रकृति रंजन है.
पप्पू यादव की शिक्षा pappu yadav education
पप्पू यादव ने अपनी स्कूली शिक्षा सुपौल के आनंद मार्ग स्कूल से पूरी की है. इसके बाद पप्पू यादव ने मधेपुरा के बी एन मंडल विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया. इसके अलावा इग्नू से डिजास्टर मैनेजमेंट और ह्यूमन राइट्स में डिप्लोमा किया है.
पप्पू यादव का राजनीतिक करियर Pappu Yadav’s political career
पप्पू यादव का नाम राजनीति के गलियारों में सबसे पहली बार साल 1990 में सुनाई दिया. इस साल बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में पप्पू यादव ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मधेपुरा की सिंहेश्वर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद पप्पू यादव ने अगले ही साल 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद पप्पू यादव ने वापस कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
दो चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लड़कर जीतने वाले पप्पू यादव इसके बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. समाजवादी पार्टी का बिहार में कोई ख़ास वोट बैंक नहीं था. लेकिन पप्पू यादव ने 1996 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर पूर्णिया से चुनाव लड़ा और फिर से जीत हासिल करके लोकसभा पहुंचे. इसके बाद साल 1999 के लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव ने फिर से पूर्णिया से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.
इसके बाद पप्पू यादव लालू प्रसाद यादव की पार्टी RJD में शामिल हो गए. पप्पू यादव ने साल 2004 में मधेपुरा सीट पर हुए उपचुनाव में आरेजडी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. साल 2009 में जब पप्पू यादव को एक हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया और उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई तो RJD ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दिया. इसके बाद पप्पू यादव ने साल 2009 के लोकसभा चुनाव में पूर्णिया सीट पर अपनी मां को बतौर निर्दलीय उम्मीदवार खड़ा किया. हालांकि इस चुनाव में उनकी मां को हार का सामना करना पड़ा.
साल 2013 में जेल से रिहा होने के बाद पप्पू यादव वापस से RJD में शामिल हो गए. इसके बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव ने प्रचंड मोदी लहर के बावजूद चार बार सांसद रहे शरद यादव को करीब 50 हजार वोटों के अंतर से हराया और पांचवी बार लोकसभा सांसद रहे. हालांकि इस चुनाव के करीब एक साल बाद ही मई 2015 में RJD ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते एक बार फिर से पप्पू यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.
RJD से बाहर होने के बाद पप्पू यादव ने अपनी खुद की पार्टी जन अधिकार पार्टी बनाई और 2019 के चुनाव में मधेपुरा से चुनाव लड़ा, हालांकि इस चुनाव में पप्पू यादव को हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी पप्पू यादव और उनकी पार्टी जन अधिकार पार्टी को निराशा ही हाथ लगी. बिहार विधानसभा चुनाव में पप्पू यादव की पार्टी ने 154 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन पप्पू यादव समेत उनकी पार्टी को भारी पराजय का सामना करना पड़ा है. उनके सभी प्रत्याशी चुनाव हार गए.
पप्पू यादव और रंजीत रंजन की लव स्टोरी pappu yadav and ranjeet ranjan love story
पप्पू यादव और रंजीत रंजन की लव स्टोरी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है. एक दबंग नेता के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले पप्पू यादव को रंजीत रंजन का फोटो देखकर ही उनसे प्यार हो गया था. दरअसल साल 1991 में पप्पू यादव बांकीपुर जेल में बंद थे. इस दौरान पप्पू यादव अक्सर जेल सुपरिटेंडेंट के आवास से लगे मैदान में बच्चों के खेलते हुए देखा करते थे. इसी मैदान पर रंजीत रंजन के भाई विक्की भी खेलने के लिए आते थे. इसी दौरान पप्पू यादव और विक्की के बीच दोस्ती हो गई.
एक दिन विक्की ने पप्पू यादव को अपनी फैमिली अल्बम दिखाई. इस अल्बम में रंजीत रंजन की फोटो को देखकर पप्पू यादव उन पर फ़िदा हो गए. जेल से बाहर आने के बाद पप्पू यादव अक्सर रंजीत रंजन से मिलने के लिए टेनिस कोर्ट पहुँच जाते थे, जहां रंजीत रंजन टेनिस खेलने के लिए आती थी. पप्पू ने यादव ने कई बार रंजीत रंजन के सामने अपने प्यार का इजहार किया, लेकिन रंजीत रंजन ने हर बार इंकार कर दिया. पप्पू यादव की किताब ‘द्रोहकाल का पथिक’ के अनुसार रंजीत रंजन के इनकार से वह इतने परेशान हो गए थे कि उन्होंने एक बार नींद की ढेरों गोलियां खा लीं थी. इसके बाद उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
हालांकि इस घटना के बाद पप्पू यादव के प्रति रंजीत रंजन के व्यवहार में कुछ परिवर्तन जरूर आया. इसके बाद पप्पू यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती रंजीत रंजन के परिवार को शादी के लिए राजी करने की थी. इसके लिए पप्पू यादव रंजीत रंजन के बहन-बहनोई को मनाने के लिए चंडीगढ़ गए, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी. इसके बाद पप्पू यादव रंजीत रंजन के दूसरे बहन-बहनोई को मनाने के लिए दिल्ली गए, लेकिन यहां भी कुछ नहीं हुआ. हर तरफ से असफलता मिलने से निराश पप्पू यादव को किसी ने सलाह दी कि वह कांग्रेस में रहे एसएस अहलूवालिया से मदद मांगे. इसके बाद एसएस अहलूवालिया की पहल पर रंजीत रंजन के परिवार वाले शादी के लिए राजी हुए.
रंजीत रंजन के माता-पिता शादी के लिए राजी हुए तो फरवरी 1994 में पप्पू यादव और रंजीत की शादी हो गई. हालांकि शादी में उस समय हंगामा मच गया था जब रंजीत और उनके परिजनों को लेकर आ रहा चार्टर्ड विमान समय पर नहीं पहुंचा. हालांकि बाद में पता चला कि विमान का पायलट रास्ता भटक गया था. जब विमान शादी के स्थल पर पहुंचा तो लोगों ने राहत की सांस ली.
पप्पू यादव के विवाद Pappu Yadav’s controversy
पप्पू यादव का विवादों से गहरा नाता रहा है. वह अक्सर किसी ना किसी चीज को लेकर सुर्ख़ियों में आते रहते है. पप्पू यादव पर साल 1998 में सीपीएम नेता अजीत सरकार की हत्या का आरोप लगा, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था. गिरफ्तारी के बाद सिक्किम की जेल में रहने के दौरान पप्पू यादव की खातिरदारी के किस्से सामने आने लगे तो उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया. साल 2008 में विशेष सीबीआई अदालत ने पप्पू यादव और दो अन्य को सीपीआई नेता की हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. हालांकि मई 2013 को पटना हाईकोर्ट ने पर्याप्त सबूत न होने की बात कहते हुए पप्पू यादव को जेल से रिहा करने आदेश दिया.
