May 29, 2021

Naveen Patnaik Biography – पांच बार बन चुके है ओडिशा के मुख्यमंत्री, पढ़िए नवीन पटनायक की जीवनी

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की जीवनी (Naveen Patnaik biography) के बारे में. नवीन पटनायक लगातार पांच बार ओडिशा के मुख्यमंत्री बन चुके है. नवीन पटनायक देश में लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहने वाले नेताओं में से एक हैं. नवीन पटनायक ऐसे नेताओं में हैं जो बहुत कम सुर्ख़ियों में रहते है.

बहुत कम लोगों को पता होगा की नवीन पटनायक किसी समय राजनीति में नहीं आना चाहते थे. उन्होंने अपने पिता का मौत के बाद राजनीति की दुनिया में कदम रखा और दुनिया को बता दिया कि वह अपनी पिता की विरासत को संभालने के योग्य हैं. नवीन पटनायक आज ओडिशा ही नहीं बल्कि देश के लोकप्रिय और करिश्माई नेताओं में से एक है.

तो चलिए दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम जाएँगे कि नवीन पटनायक कौन है? और उनका राजनीतिक सफ़र कैसा रहा है.

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नवीन पटनायक का राजनीतिक जीवन (Naveen Patnaik Biography in Hindi)

बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का जन्म 16 अक्टूबर 1946 को ओडिशा के कटक में हुआ था. नवीन पटनायक के पिता का नाम (Naveen Patnaik father name) बीजू पटनायक है. बीजू पटनायक उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी थे. बीजू पटनायक की माता का नाम ज्ञान पटनायक है. नवीन पटनायक के भाई का नाम प्रेम पटनायक है और वह दिल्ली के प्रतिष्ठित उद्योगपति है. नवीन पटनायक की बहन का नाम गीता मेहता है और वह एक प्रसिद्ध लेखिका है. नवीन पटनायक अविवाहित हैं.

नवीन पटनायक की शिक्षा (Naveen Patnaik Education)

नवीन पटनायक ने अपनी शुरूआती शिक्षा देहरादून के वेल्हम बॉयस स्कूल से ली है. इसके बाद नवीन पटनायक ने देहरादून के प्रतिष्ठित स्कूल दून स्कूल में पढ़ाई की है. नवीन पटनायक ने स्नातक की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज सेंट स्टीफन कॉलेज से पूरी की है.

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नवीन पटनायक का राजनीतिक सफर (Political Journey of Naveen Patnaik)

नवीन पटनायक पेशे से एक लेखक हैं. नवीन पटनायक युवावस्था तक राजनीति से दूर ही रहे है. युवावस्था तक उनके जीवन का काफी समय ओडिशा के बाहर ही बिता है. हालांकि 17 अप्रैल 1997 को नवीन पटनायक के पिता बीजू पटनायक का निधन हो गया. अपने पिता के निधन के बाद नवीन पटनायक ने राजनीति में कदम रखा. नवीन पटनायक ने अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत 11वीं लोकसभा से की.

नवीन पटनायक ने जनता दल के टिकट पर अपने पिता की पारंपरिक सीट अस्का लोकसभा सीट से उपचुनाव लड़ा और चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. सांसद बनने के बाद नवीन पटनायक को इस्पात और खानों से संबंधित मंत्रालय, वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति और संसद की ग्रंथालय समिति का सदस्य निर्वाचित किया गया.

करीब एक साल बाद जब नवीन पटनायक का जनता दल से मनमुटाव पैदा होने लगा तो नवीन पटनायक ने भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से अपने पिता के नाम पर राजनीतिक पार्टी का गठन किया और उसका नाम रखा बीजू जनता दल. इस तरह बीजू जनता दल उसी साल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सहयोगी बन गई.

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इसके बाद नवीन पटनायक ने साल 1998 और साल 1999 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करके लोकसभा पहुंचे. यहीं नहीं नवीन पटनायक केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी बने. इस बीच साल 2000 में ओडिशा में हुए विधानसभा चुनाव में बीजू जनता दल और भाजपा ने मिलकर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद नवीन पटनायक ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से इस्तीफा दे दिया और पहली बार ओडिशा के मुख्यमंत्री बने.

इसके बाद साल 2004 में ओडिशा में एक बार फिर से विधानसभा चुनाव हुआ. इस चुनाव में भी बीजू जनता दल और भाजपा के गठबंधन को जनता का आशीर्वाद मिला और नवीन पटनायक एक बार फिर से ओडिशा के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद साल 2009 के विधानसभा चुनावों से पहले बीजू जनता दल और भाजपा का गठबंधन टूट गया. जिसके बाद नवीन पटनायक ने वामपंथी दलों के साथ अपनी पार्टी का गठबंधन किया. उनका यह फैसला सही साबित हुआ और जनता के आशीर्वाद से नवीन पटनायक लगातार तीसरी बार ओडिशा के मुख्यमंत्री बने.

इसके बाद साल 2014 में एक बार फिर ओडिशा में विधानसभा चुनाव हुए. इस बार पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लहर चल रही थी. इसके बावजूद नवीन पटनायक ने अपने नेतृत्व में पार्टी को विधानसभा चुनावों में जीत दिलाई और चौथी बार ओडिशा के मुख्यमंत्री बने. साल 2019 में भी ओडिशा की जनता ने नवीन पटनायक पर भरोसा जताया और चुनाव में उनकी पार्टी को पूर्ण बहुमत दिया. इसी के साथ नवीन पटनायक लगातार पांचवीं बार ओडिशा के मुख्यमंत्री बने. नवीन पटनायक वर्तमान में ओडिशा के मुख्यमंत्री है.

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नवीन पटनायक से जुड़े विवाद (Naveen Patnaik Controversy)

साल 2007-2008 में ईसाई विरोधी दंगे भड़क गए, जिसमें कई लोगों की जान चली गई. इन दंगों को लेकर नवीन पटनायक को काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा. हालाँकि बाद में नवीन पटनायक ने भाजपा से गठबंधन तोड़कर इन आलोचनाओं का जवाब दिया. इसके अलावा नवीन पटनायक सरकार पर विशेषकर खनन घोटाला, चिटफंड घोटाला और कानून-व्यवस्था को लेकर भी आरोप लगे हैं. हालाँकि इन आरोपों के कारण कभी भी नवीन पटनायक की लोकप्रियता प्रभावित नहीं हुई.

नवीन पटनायक की किताबें (Naveen Patnaik books)

नवीन पटनायक एक अच्छे नेता होने के साथ-साथ एक अच्छे लेखक भी है. नवीन पटनायक ने ‘ए सेकंड पैराडाइज: इंडियन कंट्री लाइफ 1590-1947’, ‘ए डेजर्ट किंगडम: द पीपल ऑफ बीकानेर’, ‘गार्डन ऑफ लाइफ: एन इंट्रोडक्शन टू द हीलिंग प्लांट्स ऑफ इंडिया’ जैसी किताबें लिखी है.

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