E Sreedharan Biography
December 22, 2021

E Sreedharan Biography – कौन हैं मेट्रो मैन ई श्रीधरन, भारतीय रेलवे में है अहम योगदान

Metro Man E Sreedharan Biography in Hindi 

ई श्रीधरन भारत के प्रसिद्ध सिविल इंजीनियर हैं. उनका पूरा नाम इलाट्टूवल्लपित श्रीधरन है. ई श्रीधरन को लोग ‘मेट्रो मैन’ के नाम से भी जानते हैं. उन्होंने ‘कोंकण रेलवे’ और ‘दिल्ली मेट्रो’ का निर्माण कर भारत में जन यातायात को बदल दिया. भारतीय रेलवे में आधुनिक और व्यवहारिक बदलाव लाने का श्रेय भी ई श्रीधरन को ही जाता है. उनके महत्वपूर्ण कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने ई श्रीधरन को ‘पद्म भूषण’ और ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया है.

तो चलिए आज हम जानते हैं ई श्रीधरन की जीवनी (E Sreedharan Biography),ई श्रीधरन कौन है? Who is E Sreedharan? और ई श्रीधरन को मेट्रो मैन (Metro Man E Sreedharan) क्यों कहा जाता है? और पढ़ते हैं ई श्रीधरन की बायोग्राफी (E Sreedharan Biography) को विस्तार से.

जानिए देश के पहले व्यक्तिगत सत्याग्रही आचार्य विनोबा भावे की कहानी…

ई श्रीधरन ‘मेट्रो मैन’ :

ई श्रीधरन का जन्म 12 जून 1932 को केरल के पलक्कड़ में पत्ताम्बी में हुआ था. उनके परिवार का संबंध पलक्कड़ के ‘करुकपुथुर’ से रहा है. ई श्रीधरन ने अपनी शुरूआती शिक्षा पलक्कड़ के ‘बेसल इवैंजेलिकल मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल’ से पूरी की है. स्कूली शिक्षा के पूरी होने के बाद ई श्रीधरन ने पालघाट के विक्टोरिया कॉलेज में एडमिशन लिया था. इसके अलावा ई श्रीधरन ने आन्ध्र प्रदेश के काकीनाडा स्थित ‘गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज’ से ‘सिविल इंजीनियरिंग’ की डिग्री प्राप्त की है.

ई श्रीधरन का करियर : E Sreedharan career :

इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद ई श्रीधरन ने कोझीकोड स्थित ‘गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक’ में सिविल इंजीनियरिंग पढ़ाने का काम शुरू किया. इसके बाद ई श्रीधरन ने एक साल तक बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट में बतौर प्रसिक्षु कार्य किया. साल 1953 में ई श्रीधरन ने भारतीय लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित ‘इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज एग्जाम’ में सफलता हासिल की. साल 1954 में दक्षिण रेलवे में ‘प्रोबेशनरी असिस्टेंट इंजिनियर’ के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई.

साल 1964 में जब एक तूफ़ान के कारण तमिलनाडू और रामेश्वरम को जोड़ने वाला ‘पम्बन पुल’ टूट गया तो उसे वापस बनाने की जिम्मेदारी ई श्रीधरन को सौंपी गई. रेलवे ने ई श्रीधरन से कहा था कि इस पुल को पुनः बनाने का समय वैसे तो छह महीने हैं, लेकिन तुम्हे इसे तीन महीने में ही तैयार करना है. ख़ास बात यह है कि ई श्रीधरन ने मात्र 46 दिनों में ही उस पुल को फिर से तैयार करवा दिया. उनके इस कार्य के लिए उन्हें रेल मंत्री पुरुस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका हैं.

कोलकाता मेट्रो : E Sreedharan in Kolkata Metro :

ई श्रीधरन की काबिलियत को देखते हुए 1970 में उनको भारत की पहली मेट्रो सेवा कोलकाता मेट्रो की योजना व डिज़ाइन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई. ई श्रीधरन ने अपने इस कार्य को बखूबी पूरा किया. 1975 में उन्हें कोलकाता मेट्रो रेल परियोजना से हटा लिया गया.

Navika Kumar Biography- देश के खोजी पत्रकारों में शामिल है नविका कुमार का नाम

पहला जहाज़ : First Ship of E Sreedharan :

साल 1979 में ई श्रीधरन ने कोचीन शिपयार्ड ज्वाइन किया. यहां भी ई श्रीधरन ने अपनी काबिलियत का लौहा मनवाया. उन्होंने अपने अनुभव से शिपयार्ड का कायाकल्प कर दिया. साल 1981 में ई श्रीधरन के नेतृत्व में ही कोचीन शिपयार्ड का पहला जहाज़ ‘एम.वी. रानी पद्मिनी’ बनकर बाहर निकला.

कोंकण रेलवे : Konkan Railway :

साल 1987 में ई श्रीधरन को पश्चिमी रेलवे में जनरल मैंनेजर बना दिया गया. इसके बाद 1989 में वह रेलवे बोर्ड के सदस्य बन गए. भारतीय रेलवे के लिए ई श्रीधरन कितने जरुरी थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1990 में उनको रिटायर होना था, लेकिन सरकार ने उनको कॉन्ट्रैक्ट पर लेकर कोंकण रेलवे का चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया गया. कोंकण रेलवे परियोजना देश की पहली ऐसी बड़ी परियोजना थी जिसे BOT (ब्युल्ट-ऑपरेट-ट्रान्सफर) पद्धति पर कार्यान्वित किया गया था. इसका कारण यह था कि इसमें 82 किलोमीटर के स्ट्रेच में 93 सुरंगे खोदी गई और इस 760 किलोमीटर लम्बी परियोजना में 150 पुलों को बनाया गया था. ख़ास बात यह है कि ई श्रीधरन के नेतृत्व में यह योजना बिना बजट बढ़ाए समय पर पूरी हुई.

दिल्ली मेट्रो : Delhi Metro :

इसके बाद साल 1995 में ई श्रीधरन को दिल्ली मेट्रो का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया. उनके नेतृत्व में दिल्ली मेट्रो परियोजना को कुशलतापूर्वक पूरा किया गया. दिल्ली मेट्रो की सफलता के बाद ही ई श्रीधरन को मेट्रो मैन के नाम से भी जाना जाने लगा.

कोच्ची मेट्रो : Kochi Metro :

दिल्ली मेट्रो से सेवानिवृत्त होने के बाद ई श्रीधरन को कोच्ची मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया. इसके अलावा ई श्रीधरन जयपुर मेट्रो, आंध्र प्रदेश की दो प्रस्तावित मेट्रो परियोजनाएं – विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा से भी जुड़े हुए है.

ई श्रीधरन का व्यक्तिगत जीवन : Personal life of E Sreedharan :

ई श्रीधरन की पत्नी का नाम राधा श्रीधरन है. ई श्रीधरन की चार संतान है. ई श्रीधरन के जीवन पर दो जीवनी भी लिखी जा चुकी है. पहली है एमएस अशोकन द्वारा लिखित ‘कर्मयोगी: इ श्रीधरनते जीविथा कथा’ (द स्टोरी ऑफ़ इ. श्रीधरंस लाइफ) और दूसरी जीवनी पीवी अल्बी द्वारा लिखित ‘जीविथाविजयाथिन्ते पादपुस्तकम’ (अ टेक्स्टबुक ओं सक्सेस ऑफ़ लाइफ).

Indira Gandhi Biography : देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की जीवन गाथा

पुरस्कार और सम्मान : E Sreedharan Awards :

ई श्रीधरन को साल 1963 में ‘रेलमंत्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

साल 2001 में उन्हें भारत सरकार के द्वारा ‘पद्म श्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

साल 2002 में उन्हें ‘श्री ओमप्रकाश भसीन अवार्ड फॉर प्रोफेशनल एक्सीलेंस इन इंजीनियरिंग’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

साल 2003 में उन्हें टाइम पत्रिका की ओर से ‘ओने ऑफ़ अशियाज हीरोज’ और ‘आल इंडिया मैनेजमेंट असोसिएशन अवार्ड फॉर पब्लिक एक्सीलेंस’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

साल 2005 में ई श्रीधरन को ‘आईआईटी दिल्ली’ की तरफ से ‘डॉक्टर ऑफ़ साइंस’ ‘भारत शिरोमणि अवार्ड’ और ‘नाईट ऑफ़ द लीजन ऑफ़ हॉनर पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

साल 2007 में ई श्रीधरन को सीएनएन-आईबीएन द्वारा ‘इंडियन ऑफ़ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

साल 2008 में ई श्रीधरन को भारत सरकार द्वारा ‘पद्मविभूषण’ नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

साल 2009 में ई श्रीधरन को राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी कोटा द्वारा ‘डी लिट’ की उपाधि और आईआईटी रूडकी के द्वारा ‘डॉक्टर ऑफ़ फिलोसोफी’ की उपाधि दी गई.

साल 2012 में ई श्रीधरन को ‘श्री चित्र थिरूनल नेशनल अवार्ड’ और एस आर जिंदल प्राइज से सम्मानित किया गया.

साल 2013 में ई श्रीधरन को टीकेएम 60 प्लस अवार्ड फॉर लाइफटाइम अचीवमेंट और महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी के द्वारा ‘डॉक्टर ऑफ़ साइंस’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके अलावा इसी साल उन्हें रोटरी इंटरनेशनल द्वारा ‘फॉर द सके ऑफ़ हॉनर’ तथा ग्रिफल्स द्वारा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट गवर्नेंस अवार्ड’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

साल 2013 में ई श्रीधरन को जापान का राष्ट्रिय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ़ द राइजिंग सन-गोल्ड एंड सिल्वर स्टार’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

उम्मीद करते हैं आपको ई श्रीधरन की लाइफ स्टोरी (E Sreedharan Biography) पसंद आई होगी. हमें कमेंट्स के माध्यम से जरुर बताएं. 

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *