Makers-directors ki pahali  pasand rahe film abhineta pradeep
January 8, 2018

निर्माताओं-निर्देशकों की पहली पसंद रहे फिल्म अभिनेता प्रदीप कुमार

हिन्दी सिनेमा में प्रदीप कुमार को ऎतिहासिक किरदारों के लिए याद किया जाता है. ऎसे अभिनेता जिन्होंने 50 और साठ के दशक में अनारकली और नूरजहां फिल्म में उन्होंने दमदार अभिनय किया था और आज भी किसी फिल्म में राजा, नवाब और राजकुमार की किरदार की जरुरत होती है तो उन्हें जरुर याद किया जाता है. उनके उत्कृष्ट अभिनय से सजी अनारकली, बहू बेगम, ताजमहल जैसी फिल्मों को लोग आज भी नहीं भूले हैं.

प्रदीप कुमार :

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4 जनवरी 1925 को जन्मे शीतल बटावली उर्फ प्रदीप कुमार एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. वह बचपन में अभिनेता बनने का सपना देखते रहते थे और इसी सपने को पूरा करने के लिए वह रंगमंच से जुड़ गए. लेकिन उनके पिता जी इस बात के लिए राजी नहीं थे.

नाटक में अभिनय :

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प्रदीप कुमार जी एक नाटक में अभिनय कर रहे थे उसी दौरान उनकी मुलाकात निर्देशक देविका बोस से हुई. उन्होंने प्रदीप जी का अभिनय देखकर बहुत ही प्रभावित हुए जो उनमे एक उभरता सितारा दिखाई दिया फिर उन्होंने अपनी बंगला फ़िल्म अलखनंदा में उन्हें काम करने का मौका दिया. इस फिल्म में नायक के रूप में अपनी पहचान नहीं बना पाए. लेकिन वह एक अभिनेता के रूप में फिल्म करियर में अपनी शुरुवात करी.

सहायता के रूप :

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उन्होंने अपनी हार नहीं मानी और एक बार फिर बंगला फिल्म भूली नाय में अभिनय किया और इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सिल्वर जुबली मनायी. इसके बाद प्रदीप कुमार अपने सपने को पूरा करने के लिए हिंदी सिनेमा का रुख करके मुबई आ गए और कैमरामैन धीरेन डे के सहायता के रूप में काम करने लगे. फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए कई संघर्ष करते रहे. यहाँ तक की उन्होने हीरे बनने के लिए हिंदी और उर्दू भाषा सिखाना शुरु कर दी थी.

पहली पसंद :

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एक बार फिर 1952 में फ़िल्म आंनद मठ में  पृथ्वीराज कपूर के साथ प्रदीप कुमार  भी मुख्य अभिनेता के रूप में दिखाई दिए. पृथ्वीराज जी की उपस्थिति में भी दर्शकों के बीच प्रदीप जी ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी. इस फ़िल्म की सफलता के बाद प्रदीप कुमार बतौर अभिनेता हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए. इसके बाद उन्होंने अनारकली में शहजादा सलीम अभिनय किया जो सभी को बहुत ही पसंद आया. इस फिल्म के बाद वह ऐतिहासिक फिल्मों के लिए निर्माताओं-निर्देशकों की पहली पसंद बन गए.

प्रदीप जी की जोड़ी :

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प्रदीप कुमार जी ने फिल्म नागिन में भी अभिनय किया वह भी सफल रही इसके बाद तो सभी दर्शक उनके दीवाने हो गए और इसके गीत मन डोले मेरा तन डोले और मेरा दिल ये पुकारे आजा सभी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हुए. उन्होंने सन 1956 में 10 फिल्में रिलीज हुईं. जिनमें जागते रहो, राजनाथ, बंधन और हीर जैसी फिल्में है. प्रदीप जी की जोड़ी मीना कुमारी के साथ खूब चली. उन दोनों की जोड़ी वाली फिल्म बंधन, बहू बेगम, नूरजहां, आरती और भींगी रात आदि है. उन्होंने अभिनय के हर किरदार की भूमिकाए निभाई. यहाँ तक की उन्होंने बंगला नाटको में भी जौहर दिखाया था.

निधन :

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प्रदीप कुमार का 27 अक्टूबर 2001 को निधन हो गया . हिन्दी सिनेमा में लगभग चार दशक तक अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों के बीच ख़ास पहचान वाले प्रदीप कुमार को ऐतिहासिक किरदारों के रूप में याद किया जाता है. ऐसे एक्टर के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने पचास और साठ के दशक में राजकुमार या नवाब की भूमिका की जरूरत होती थी तो प्रदीप कुमार को याद किया जाता था.

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