Kiren Rijiju Biography –दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे देश के कानून मंत्री और देश के बड़े नेताओं में से एक किरेन रिजिजू के बारे में. दोस्तों किरेन रिजिजू वैसे तो किसी पहचान के मोहताज नहीं है. किरेन रिजिजू नरेन्द्र मोदी सरकार के दोनों कार्यकाल में मंत्री रहे है. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में किरेन रिजिजू केंद्रीय गृह राज्य मंत्री थे. वहीं दूसरे कार्यकाल में उन्हें खेल मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था. इसके बाद नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले कैबिनेट विस्तार में किरेन रिजिजू को कानून मंत्री बनाया गया.
किरेन रिजिजू से पहले कानून मंत्रालय रवि शंकर प्रसाद के पास था, लेकिन उन्हें हटाकर इस मंत्रालय का जिम्मा किरेन रिजिजू को सौंपा गया. किरेन रिजिजू के प्रमोशन से यह तो साफ़ है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उनके काम से खुश है. दोस्तों किरेन रिजिजू के नाम से तो हम सभी वाकिफ है, लेकिन ज्यादातर लोग उनके राजनीतिक करियर सहित अन्य चीजों के बारे में नहीं जानते हैं. तो दोस्तों इस आर्टिकल के जरिए हम जानेंगे कि किरेन रिजिजू कौन है?, किरेन रिजिजू की शिक्षा और उनके परिवार के बारे में भी जानेगे. तो चलिए शुरू करते है किरेन रिजिजू का जीवन परिचय.
किरेन रिजिजू जीवनी (Kiren Rijiju Biography)
दोस्तों किरेन रिजिजू का जन्म 19 नवंबर 1971 को अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले के नफरा में हुआ था. किरेन रिजिजू के पिता का नाम रिनचिन खारू है. किरेन रिजिजू की माता का नाम चिरई रिजिजू है. किरेन रिजिजू का कोई भाई या बहन नहीं है. किरेन रिजिजू के पिता रिनचिन खारू भी एक राजनेता थे और वह अरुणाचल प्रदेश की प्रथम विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष थे. किरेन रिजिजू बौद्ध धर्म का पालन करते है.
किरेन रिजिजू की शिक्षा (Kiren Rijiju Education)
किरेन रिजिजू ने अपनी स्कूली शिक्षा अरुणाचल प्रदेश में ही पूरी की है. इसके बाद किरेन रिजिजू ने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से बीए की शिक्षा हासिल की है. इसके बाद किरेन रिजिजू ने दिल्ली विश्वविध्यालय से एल.एल.बी. की पढ़ाई की है.
किरेन रिजिजू का करियर (Kiren Rijiju career)
किरेन रिजिजू के पिता राजनीति में थे तो किरेन रिजिजू का मन भी बचपन से ही सामाजिक कार्यों की तरफ ज्यादा था. वह स्कूल के दिनों में ही आंदोलनों में भाग लेने लगे थे. किरेन रिजिजू ने साल 1987 में मास्को में आयोजित यूएसएसआर में भारत महोत्सव में भाग लिया था. राजनीति में रूचि होने के साथ-साथ किरेन रिजिजू को खेलों का भी काफी शौक था. वह एक अच्छे एथलिट थे और उन्होंने कई राष्ट्रीय खेलों में भाग भी लिया है.
2004 में बने पहली बार सांसद
किरेन रिजिजू साल 2004 में पहली बार अरुणाचल पश्चिम से चुनाव जीतकर लोकसभा सांसद बने. अपने पहले ही कार्यकाल में किरेन रिजिजू ने संसद में अपने काम से अन्य नेताओं को प्रभावित किया. हालाँकि साल 2009 के लोकसभा चुनाव में किरेन रिजिजू को हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद भाजपा ने किरेन रिजिजू को गुजरात से राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्हें अरुणाचल प्रदेश में ही काम करना है.
2014 में बने केंद्रीय मंत्री
साल 2009 में मिली हार के बाद किरेन रिजिजू ने किसी कारण से भाजपा छोड़ दी हालाँकि साल 2012 में किरेन रिजिजू एक बार फिर से भाजपा में शामिल हो गए. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने किरेन रिजिजू को अरुणाचल पश्चिम टिकट दिया और किरेन रिजिजू चुनाव जीतकर नरेन्द्र मोदी सरकार में मंत्री बने. मई 2014 में उन्हें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बनाया गया.
देश के कानून मंत्री बने
साल 2019 के चुनाव में जीत हासिल करने के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में किरेन रिजिजू को पहले खेल मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया और फिर कानून मंत्री बनाया गया.
किरेन रिजिजू का परिवार (Kiren Rijiju family)
किरेन रिजिजू के परिवार में उनकी पत्नी और तीन बच्चे है. किरेन रिजिजू की पत्नी (Kiren Rijiju Wife) का नाम जोरम रीना रिजिजू है. किरेन रिजिजू के बेटे (kiren rijiju son) का नाम सांचो रिजिजू. किरेन रिजिजू की दो बेटियां (kiren rijiju daughter) है जिनका नाम नाथी रिजिजू और जाजे रिजिजू है.
किरेन रिजिजू विवाद (Kiren Rijiju controversy)
एक बार किरेन रिजिजू ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि वह खुद गोमांस खाते हैं और नॉर्थ ईस्ट में यह परंपरा है. इसलिए इस पर प्रतिबंध कैसे लगाया जा सकता है. हालाँकि विवाद बढ़ने पर उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया था.
किरेन रिजिजू की संपत्ति (Kiren Rijiju property)
एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में किरेन रिजिजू की सम्पत्ति लगभग डेढ़ करोड़ रुपए थी. वहीँ बात करे किरेन रिजिजू की सैलरी (Kiren Rijiju salary) की तो कैबिनेट मंत्री के रूप में किरेन रिजिजू को हर महीने 1,00,000 रुपए सैलरी के रूप में दिया जाता है. इसके अलावा उन्हें 70,000 रुपए निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 60,000 रुपए कार्यालय भत्ता, 2,000 रुपए सत्कार भत्ता दिया जाता है. इसके अलावा उन्हें संसद सदस्य की तरह की यात्रा भत्ता/यात्रा सुविधाएं, रेल यात्रा सुविधाएं, स्टीमर पास, आवास, टेलीफोन सुविधाएं और वाहन क्रय हेतु अग्रिम राशि मिलती है.
