June 27, 2018

प्रेग्नेंट महिलाओं का मसीहा है ये ऑटो चालक, 2हजार से अधिक लोगों की कर चुका है मदद

देश में सरकार चाहे जिसकी भी हो लेकिन सरकारी अस्पतालों की लचर व्यवस्था की पोल खुल ही जाती है. कहीं सरकारी अस्पताल में एंबुलेंस नहीं है तो कहीं बिजली नही हैं कहीं डॉक्टर की जगह सफाईवाला ऑपरेशन करता है. ऐसे में न जाने आए दिन कितने मासूम लोगों की जान के साथ खिलवाड़ होता है. अकसर आप ऐसी कई खबरें पढ़ते और सुनते होंगे, जिनमें किसी असहाय की मौत का कारण वक्त पर उस व्यक्ति को सही इलाज न मिल पाना है. ऐसे में अकसर वाहन या एंबुलेंस की कमी भी भारी पड़ती है.

कलियुग में नेक दिल ऑटोवाला

महान कवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचीत कविता “ मनुष्यता ” की एक पंक्ति है , ’वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ’ जो मनुष्य दूसरों की कष्ट और मुसिबतों के काम में आता है, वही सच्चा मनुष्य है. आज के दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम पाए जाते है. जहां आज के समय में मदद और इंसानियत की बात आए तो कुछ ही लोग सामने आते हैं. ऐसे में अगर जरूरत के वक्त आप किसी ऑटो चालक से मदद मांगते हैं तो वे यात्री से मुसीबत या मजबूरी देखकर दुगुना किराया वसूलते हैं. लेकिन एक ऐसा नेकदिल ऑटो चालक भी है जो प्रेग्नेंट महिलाओं, सैनिकों, दिव्यांगों को अपनी ऑटो में बैठाकर मुफ्त में उनके ठिकाने तक पहुंचाते हैं. अब तक ये नेकदिल इंसान दो हजार से अधिक लोगों की सहायता कर चुका है. इस दरियादिल इंसान का नाम है Munnesa मानगुली (Munnesa Managuli). जो कर्नाटक के रहने वाले हैं.

प्रेग्नेंट महिलाओं को फ्री में हॉस्पिटल पहुंचाता है ये ऑटो चालक

पिछले 11 सालों से किराए पर ऑटो चलाते हैं. उनके दिन-रात ऑटो चलाने के बाद जो कमाई हो जाती है, उसमें से 250रुपये वह किराए पर ऑटो देनेवाले को थमा देते हैं. Munnesa ने एक न्यूजपेपर से बातचीत करते हुए बताया कि मैनें साफ-साफ लिखा है कि मैं किन किन लोगों को फ्री राइड देता हूं. वे मुझे फोन भी कर सकते हैं. कई लोगों के पा मेरा नंबर भी है. अगर मैं किसी हॉस्पिटल से आ रहा हूं तो मैं ऐसे लोगों को उनकी जरूरत के हिसाब से उनके घर या रेलवे स्टेशन पर छोड़ देता हूं.

ऐसे मिली प्रेरणा

अब आप सोच रहे होंगे कि Munnesa को ये विचार आया कहां से कि वे इन लोगों की फ्री में मदद करें. क्योंकि कहते हैं न कि एक अलग इंसान के पीछे कोई न कोई घटन छुपी ही होती है. ऐसी ही कहानी है Munnesa की भी. दरअसल साल 1992 में उनकी आंखों के सामने एक प्रेग्नेंट महिला की मौत हो गई थी और वजह थी कि उसे हॉस्पिटल तक ले जाने के लिये तीमारदारों को समय पर कोई वाहन नहीं मिला था. Munnesa ने स्नातक किया हुआ है लेकिन नौकरी न मिलने की वजह से वे ऑटो चलाने लगे.

2 हजार से अधिक लोगों की कर चुके हैं मदद

लेकिन जब Munnesa ने घर का खर्च चलाने के लिए ऑटो चलाना शुरू करा तो उन्होंने तभी ये निर्णय लिया कि वह किसी भी प्रेग्नेंाट महिला, नई मांओं, शारीरिक रूप से अपंग व्यखक्तियों और सैनिकों से एक पैसा नहीं लेंगे.पिछले 3साल से तो Munnesa इस काम की बाकायदा लॉग बुक भी मेंटेन कर रहे हैं, जिसमें मुफ्त मदद पाने वाले लोगों के नाम भी दर्ज हैं. अब तक यह नेकदिल शख्स 2हजार से अधिक लोगों को फ्री राइड करा चुका है. वह वक्त -बेवक्तब ऐसे जरूरतमंद लोगों की मदद करने में जरा भी लापरवाही नहीं बरतते हैं.

अपना पेट काट कर करते हैं मदद

हालांकि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि Munnesa अपना एक खुद का ऑटो खरीद सकें, इसलिये वे किरायए पर ऑटो चलाते हैं और रोज ऑटो मालिक को 250 रुपये किराया भी देते हैं. लेकिन अपने परमार्थ के कार्य को वह बिना किसी रुकावट के जारी रखे हुए हैं. इंसानियत के नाते Munnesa द्वारा उठाया गया यह कदम लाचार, जरूरतमंदों के लिए खुदा के किसी नेमत से कम नहीं है. Munnesa का यह काम समाज में संवेदनशीलता की एक मिसाल है जो इंसानियत को जिंदा रखे हुए है.

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