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December 12, 2017

दहेज प्रथा महिलाओं की जुबानी, चुनौतियों की कहानी

भारत में दहेज प्रथा काफी पुरानी है, सदियों से चली आ रही इस प्रथा को अब लोगो ने अपना धंधा बना लिया है. माता पिता कन्या के विवाह के समय भेट स्वरूप धन-सम्पत्ति, गाय आदि चीजे कन्या को देते थे.

माता पिता के द्वार दिए जाने वाले दहेज़ के बारे में लड़के वालो को अंदाजा नहीं होता था और न ही वह अपनी और से किसी तरह की कोई मांग करते थे.

बदलता समय इस रीतिरिवाज को भी बदलता गया कन्या की शादी में स्वेच्छा से दिया जाने वाला धन धीरे-धीरे लड़के वालो का एक तरह से अधिकार बनने लग गया. आज के समय में तो कई व्यक्ति दहेज़ को अपना जन्मसिद्ध अधिकार ही मानने लग गए हैं.

दहेज प्रथा के जन्म के कारण

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प्राचीन काल में जब राजा महाराजा या अधिक धनिक व्यक्ति अपने कन्या की शादी करते थे तो वह अपनी बेटी को सोना, चाँदी हीरे, जवाहरात प्रचुर मात्रा देते थे. माता पिता के द्वारा भेट स्वरूप दिए जाने वाले धन या अन्य सम्पति को लोगो ने अपना अधिकार बना लिया है.

समाज की सोच

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आलम तो यह हो गया है की यह प्रथा विश्व में फैल गई है. किसी ने सच ही कहा है की समाज जिसे अपना लेता है तो दोष भी गुण बन जाता है. लोगो की सोच के चलते ही भारतीय समाज में महिलाओ को पुरुष कि अपेक्षा छोटा समझा जाता है.

मजबूरी का उठाया जाता है फायदा

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वैसे तो दहेज लेना और देना दोनों ही निन्दनीय कार्य हैं. लेकिन इसके बावजूद आज के समय में दहेज़ प्रथा प्रचुर मात्रा में समाज में फैली हुई है. जब लड़का और लड़की दोनों ही शिक्षा-दीक्षा में समान है. दोनों ही रोजगार में समान है तो फिर क्यों की जाती है दहेज की मांग? कई बार वरपक्ष वाले कन्यापक्ष की मजबूरी का नाजायज फायदा उठाते है.

लड़की वालो को दिया जाता है दहेज़

भारत देश में कुछ जातियां ऐसी भी हैं जो लड़की वालो को दहेज देकर उनसे शादी करते है. हालांकि ऐसा बहुत कम देखा जाता है. जब कोई लड़के वाले लड़की वालो को दहेज़ देकर शादी करते है. अब तो अधिकतर लड़के वाले ही दहेज की मांग करते है.

पैसा पैदा करने की मशीन

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दहेज प्रथा दिन प्रतिदिन विकराल रूप धारण करती जा रही है जिसे देखते हुए कहा जा सकता है की यह कभी शान्त नहीं होने वाली है.लड़के वाले तो लोभी की तरह लड़की के माता-पिता के घर से कुछ-न-कुछ मंगाते ही रहते है और अपना घर भरते है. लड़के के परिवार वाले अपने लड़के को पैसा पैदा करने की मशीन मात्र समझते हैं.

किया जाता है प्रताड़ित

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कई बार जब लड़की ससुराल वालो का दहेज़ के मामले में कुछ नहीं सुनती है तो उसे काफी प्रताड़ित भी किया जाता है. दहेज़ के लिए हम आये दिन ऐसी कई खरे सुनते है जो इस बात का प्रमाण है.

दहेज़ का दानव

दहेज प्रथा हर दिन किसी दानव की तरह विकराल रूप धारण करती जा रही है. सरकार ने भी इस प्रथा को रोकने के लिए सख्त कानून बनाये है लेकिन फिर भी कई व्यक्ति इस कानून को मैंने के लिए तैयार नहीं है.

हमसे हो रही है चूक

दहेज़ प्रथा को रोकने के कई प्रयास के बावजूद ऐसा लगता है कि हमसे ही कहीं-न-कहीं कोई गलती हो रही है. क्योंकि कानून बनाने के बाद भी न तो दहेज लेने में कोई अंतर दर्ज किया गया है और न ही नवयुवतियों के द्वारा की जाने वाली आत्महत्याओं में कमी आ रही है.

ये चीजे लेते है दहेज़ में

लड़के वाले शादी में लड़की वालो से मोटी रकम वसूलने के साथ ही रंगीन टीवी, अलमारी,सोफा सेट, घड़ी, डायनिंग टेबल, अंगूठियां और भी कई चीजों की दिमांड रख देते है.

करना होगी पहल

दहेज के कलंक को समाज से निकलने के लिए हमें किसी के भरोसे नहीं बैठना होगा. दहेज रूपी सामाजिक बुराई को हमें जड़ से उखाड़ना होगा. लोगों की मानसिकता को बदलकर दहेज़ प्रथा बंद करवानी होगी.

बन गया है बिजनेस

लोगो ने तो दहेज प्रथा को एक तरह से अपना बिजनेस ही बना लिया है. इस प्रथा को ख़त्म करने के लिए हमें तत्काल ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है. धीरे धीरे यह प्रथा किसी व्यवसाय का रूप लेती नजर आ रही है.

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