आख़िरकार एमके स्टालिन (MK Stalin) के नेतृत्व में द्रमुक (DMK) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक (AIADMK) को हरा दिया है. इसी के साथ तमिलनाडु में AIADMK के 10 वर्ष के शासन का अंत हो गया है. DMK की इस जीत में एमके स्टालिन नायक बनकर सामने आए हैं. DMK की इस जीत के बाद तय है कि एमके स्टालिन ही तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री होंगे. ख़ास बात यह है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव इस बार जयललिता और करुणानिधि की गैरमौजूदगी में लड़ा गया. ऐसे में DMK की इस धमाकेदार जीत ने एमके स्टालिन को तमिलनाडु का सबसे दमदार नेता के रूप में स्थापित किया. तो चलिए आज हम जानते है कि एमके स्टालिन कौन है? (who is mk stalin? ) और वह कैसे तमिलनाडु के दमदार नेता बनकर उभरे?
एमके स्टालिन जीवनी (mk stalin biography in hindi)
एमके स्टालिन का जन्म 1 मार्च 1953 को तमिलनाडु में हुआ था. एमके स्टालिन का पूरा नाम मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन है. एमके स्टालिन के पिता का नाम करुणानिधि और माता का नाम श्रीमती दयालु अम्मल है. करुणानिधि तमिलनाडु की राजनीति के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री रहे हैं. स्टालिन करुणानिधि के तीसरे बेटे है. एमके स्टालिन ने मद्रास विश्वविद्यालय के नंदनम आर्ट्स कॉलेज से इतिहास डिग्री हासिल की है.
एमके स्टालिन की बचपन से ही राजनीति में रूचि थी. वह बचपन से ही अपने पिता के साथ प्रचार-प्रसार किया करते थे. साल 1967 के चुनाव में मात्र 14 साल की उम्र में एमके स्टालिन ने खूब प्रचार प्रसार किया. साल 1973 में एमके स्टालिन को DMK की जनरल कमेटी में चुना गया. साल 1975 में देश में लगे आपातकाल के दौरान एमके स्टालिन जेल भी गए.
एमके स्टालिन साल 1989 में चेन्नई के थाउजेंड लाइट्स निर्वाचन क्षेत्र से तमिलनाडु विधानसभा के चुने गए. साल 1996 में एमके स्टालिन को बिना किसी इलेक्शन के सीधे चेन्नई शहर के मेयर के पद पर अपॉइंट किया गया. इस तरह एमके स्टालिन की पहचान तमिलनाडु की राजनीति में एक दबंग नेता के तौर पर होने लगी. साल 2009 में एमके स्टालिन अपने पिता करुणानिधि की सरकार में उपमुख्यमंत्री बने. साल 2017 में एमके स्टालिन को DMK का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया. साल 2018 में करुणानिधि के निधन के बाद DMK की जनरल काउंसिल द्वारा स्टालिन को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया.
हालांकि एमके स्टालिन का राजनीतिक सफ़र कभी भी आसान नहीं रहा. उन्हें पार्टी के बाहर ही नहीं बल्कि अंदर भी चुनौती का सामना करना पड़ा. उन पर वंशवाद के आरोप लगाए गए. यहीं नहीं करुणानिधि की विरासत को लेकर उनका अपने ही भाइयों एमके मुत्थु और एमके अलगिरी से विवाद भी हुआ. हालांकि यह विवाद खत्म हुआ साल 2013 में जब करूणानिधि ने ये ऐलान कर दिया कि उनकी मौत के बाद पार्टी के प्रमुख स्टालिन होंगे. दूसरी तरफ मुत्थु और अलगिरी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जिसके बाद स्टालिन की ताकत पार्टी में बढ़ती गई.
एमके स्टालिन का नाम स्टालिन क्यों रखा गया, इसके पीछे भी दिलचस्प वजह है. दरअसल जब एमके स्टालिन पैदा हुए थे, उसी हफ्ते सोवियत रूस के प्रेसिडेंट जोसफ स्टालिन की मौत हुई थी. उन्हीं के नाम पर इनका नाम ‘स्टालिन’ रख दिया गया. एमके स्टालिन को क्रिकेट, बैडमिंटन और शतरंज का भी काफी शौक है. उन्होंने अपने पिता करूणानिधि की तरह तमिल फिल्मों और टीवी सीरियलों में भी काम किया है.
