17 फरवरी 2021 को कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा का 73 साल की उम्र में निधन हो गया है। सतीश शर्मा कैंसर से पीड़ित थे और पिछले काफी समय से वह बीमार थे। सतीश शर्मा का नाम कांग्रेस के बड़े नेताओं में शामिल रहा है। सतीश शर्मा को राजनीति में लाने के श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को जाता है। सतीश शर्मा के निधन पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने दुःख जाहिर किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि, ‘दिल से उदार, दोस्ती में दृढ़ और अंत तक वफादार।।। मैं आपको हमेशा याद करूंगी।’
कैप्टन सतीश शर्मा का जन्म 11 अक्टूबर 1947 को तेलंगाना के सिकंदराबाद में हुआ था। उन्होंने देहरादून के कर्नल ब्राउन कैंब्रिज स्कूल से शिक्षा पूरी की है। इसके बाद उन्होंने पायलट की ट्रेनिंग ली और एयर इंडिया में नौकरी करने लगे। पायलट की नौकरी करने के दौरान ही सतीश शर्मा और राजीव गाँधी की मुलाकात हुई। उसी दौरान राजीव गांधी भी पायलट हुआ करते थे। हालांकि अपने भाई संजय गाँधी के निधन के बाद जहां राजीव गांधी पायलट की नौकरी छोड़कर राजनीति में आ गए जबकि दूसरी तरफ सतीश शर्मा ने पायलट की नौकरी जारी रखी।
साल 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या होने के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बन गए। प्रधानमंत्री बनने के बाद राजीव गांधी अपने दोस्त सतीश शर्मा को राजनीति में लेकर आए और उन्हें अपनी सलाह देने वाली कोर टीम में शामिल कर लिया। राजीव गांधी ने सतीश शर्मा को अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी में विकास कार्यों को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी सौंपी। सतीश शर्मा ने हमेशा अपने दोस्त राजीव गाँधी के साथ दिया। एक तरफ जहां राजीव गाँधी के तमाम साथी उन्हें छोड़कर जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ सतीश चट्टान की तरह अपने दोस्त के साथ बने रहे। साल 1986 में सतीश शर्मा को मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद बनाकर भेजा गया।
सतीश शर्मा की जिंदगी में अहम् मोड़ आया साल 1991 में। इसी साल उनके दोस्त राजीव गांधी की हत्या हो गई। राजीव गाँधी की हत्या के बाद अमेठी में उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सतीश शर्मा को सौंपी गई। साल 1991 में सतीश शर्मा ने अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड मतो से जीत हासिल की। सतीश शर्मा को साल 1993 में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री बनने का मौका मिला। साल 1996 के लोकसभा चुनाव में सतीश शर्मा एक बार फिर से अमेठी से जीतकर लोकसभा पहुंचे। हालांकि 1998 के लोकसभा चुनाव में सतीश शर्मा को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1999 में सतीश शर्मा ने अमेठी सीट सोनिया गाँधी के लिए छोड़ दी और रायबरेली सीट से चुनाव लड़े। सतीश शर्मा के लिए रायबरेली सीट से चुनाव जीतना कठिन माना जा रहा था, लेकिन आखिरी समय प्रियंका गांधी की रैली से माहौल बदला और वह रायबरेली से जीतकर तीसरी बार लोकसभा पहुंचे।
साल 2004 में जब राहुल गाँधी ने राजनीति में कदम रखा तो सोनिया गाँधी ने उनके लिए अपने अमेठी की सीट छोड़ी और सतीश शर्मा ने सोनिया गाँधी के लिए रायबरेली सीट छोड़ी। इसके बाद सतीश शर्मा ने सुल्तानपुर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गए। हालांकि बाद में कांग्रेस ने सतीश शर्मा को राज्यसभा भेज दिया और फिर 2016 तक वह उच्च सदन में रहे।
