June 13, 2021

Chirag Paswan Biography : कौन हैं चिराग पासवान ? जानिए उनके बारे में विस्तार से

हेलो दोस्तों ! हमारे देश में हमेशा से ही कुछ खास फ़ील्ड्स हैं जहाँ लोगों का ध्यान कुछ ज्यादा ही खींचा हुआ रहता है. जैसे बॉलीवुड या बिज़नस फील्ड या फिर राजनीति. आज हम बात कर रहे हैं राजनीति यानि पॉलिटिक्स के बारे में. पॉलिटिक्स में कुछ चहरे काफी खास हैं जिन्हें देखते ही उनकी पूरी कथा आँखों के सामने होती हैं. ऐसे में हम आपको बताने वाले हैं बिहार की राजनीति के एक अहम् किरदार चिराग पासवान के बारे में. चिराग के बारे में यूं तो हम कुछ हल्की-फुल्की बातें जानते ही हैं. इसके अलावा आज हम आपको कुछ खास बताने जा रहे हैं. चलिए जानते हैं चिराग पासवान के बारे में विस्तार से :

चिराग पासवान का जन्म (Chirag Paswan Date of Birth) :

चिराग का जन्म 31 अक्टूबर 1983 को बिहार में हुआ था. बचपन से ही चिराग काफी प्रतिभाशाली रहे हैं. उन्होंने बीटेक (कंप्यूटर साइंस) इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, बुंदेलखंड यूनवर्सिटी, जानशी से ग्रेजुएशन किया है. पढाई में अच्छे होने के साथ ही चिराग को अभिनय में भी काफी रूचि रही है. उन्होंने अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में कई नाटकों में भाग लिया है.

चिराग पासवान का परिवार (Family of Chirag Paswan) :

सबसे पहले बताते हैं चिराग के पिता के बारे में जिन्हें हम सभी ‘बिहार के प्रमुख राजनेताओं में से एक’ के तौर पर भी जानते हैं. चिराग पासवान के पिता का नाम राम विलास पासवान है. राम विलास पासवान ने कई क्षेत्रों में सक्रीय रहते हुए बिहार सरकार के लिए काम किया है. राम विलास ने भारत सरकार के लिए कई सेवाएँ दी हैं. राम विलास पासवान रेल मंत्रालय, खान मंत्रालय, रसायन और उर्वरक मंत्रालय और भी कई मंत्रालयों में केन्द्रीय मंत्री रह चुके हैं. 8 अक्टूम्बर 2020 को राम विलास पासवान का निधन हो गया था.

चिराग पासवान की मां का नाम रीना पासवान है और वे एक गृहिणी यानि हाउस वाइफ हैं. चिराग की एक बहन हैं जिनका नाम निशा पासवान है. उनकी एक सौतेली बहन भी हैं जिनका नाम आशा पासवान है और वे राजनीति में रूचि रखती हैं. इसके अलावा एक और सौतेली बहन हैं जिनका नाम उषा पासवान है.

चिराग पासवान अनुसूचित जाति से बिलोंग करते हैं और यह भी बता दें कि चिराग पासवान अविवाहित हैं.

चिराग पासवान का फ़िल्मी सफ़र (Film Career of Chirag Paswan) :

यह हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि चिराग को बचपन से ही अभिनय में रूचि थी. इसी रूचि को आगे बढ़ाते हुए चिराग ने साल 2011 में एक फिल्म ‘मिली ना मिली हम’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था. लेकिन फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं किया. यहाँ से निराशा हाथ लगने के बाद भी चिराग ने हार नहीं मानी और राजनीति की ओर अपना रुख किया.

चिराग पासवान का राजनीति का सफ़र (Chirag Paswan in Politics) :

राजनीति में आने पर चिराग पासवान ने कहा था कि उनके पिता की बीमारी के कारण उनका इस फील्ड में आना हुआ. इसके साथ ही चिराग ने यह भी कहा था कि पॉलिटिक्स उनका आराम क्षेत्र है जबकि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा नहीं है. चिराग पासवान लोक जनशक्ति पार्टी के राजनेता है. इसके साथ ही बता दें कि वे बिहार से जमुई लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं. चिराग ने साल 2014 में लोकसभा चुनावों में जीत का ढंका बजाया था. चिराग ने जमुई लोकसभा सीट और 85,000 से अधिक मतों से जीत दर्ज करते हुए राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार सुधांशु शेखर भास्कर को मात दी थी.

चिराग पासवान के पद और सेवाएँ (Posts of Chirag Paswan) :

1. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर स्थायी समिति (सदस्य)

2. परामर्शदात्री समिति, मानव संसाधन विकास मंत्रालय (सदस्य)

3. संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजनाओं पर समिति (MPLADS) (सदस्य)

4. हिंदी सलाहकार समिति, आर्थिक मामलों के विभाग और वित्तीय सेवा, वित्त मंत्रालय (सदस्य)

5. सतर्कता और निगरानी सेल, जमुई (अध्यक्ष)

6. विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और वन संबंधी स्थायी समिति (सदस्य)

7. भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्वास (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2015 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता के अधिकार पर संयुक्त समिति (सदस्य)

8. सुरक्षा हित प्रवर्तन और ऋण कानून और विविध प्रावधान (संशोधन) विधेयक, 2016 की वसूली पर संयुक्त समिति (सदस्य)

9. चिराग ने साल 2019 के लोकसभा चुनावों में फिर से जमुई सीट पर जीत हासिल की. जिसके बाद 5 नवंबर 2019 को चिराग पासवान को लोक जनशक्ति पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया.

चिराग पासवान की कुछ खास बातें (Special of Chirag Paswan) :

1. चिराग पासवान एक एनजीओ भी चलाते हैं जिसका नाम चिराग पासवान फाउंडेशन है.

2. इलेक्शंस के दौरान वे कई राज्यों की यात्रा कर चुके हैं, इस दौरान उन्होंने कई चुनावी रैलियों को अंजाम दिया है.

3. अपने एक भाषण के लिए वे काफी चर्चा में रहे थे, जब उन्होंने समाज के सामने एक आलोचनात्मक भाषण में कहा था, “मुझे ऐसा लगता है कि राम मंदिर का निर्माण हमारा एजेंडा नहीं होना चाहिए. बल्कि हमें सिर्फ किसानों, नौकरियों, विकास आदि को प्राथमिकता पर रखना चाहिए.”

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