पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह (Former Prime Minister Chaudhary Charan Singh) और रालोद सुप्रीमो अजीत सिंह (Ajit Singh) चाहे अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके किए कामों से वे हमेशा अमर रहेंगे. अजीत सिंह का निधन (Ajit Singh Death) देशभर में फैली बीमारी कोरोना के संक्रमण से हुआ. तो चलिए अब जानते हैं कौन थे अजीत सिंह? कैसा रहा अजीत सिंह का राजनितिक सफ़र? और अजीत सिंह के बारे में खास बातें :
अजीत सिंह का जन्म (Ajit Singh date of birth) :
रालोद सुप्रीमो चौधरी अजीत सिंह का जन्म 12 फरवरी 1939 को मेरठ के भडोला गांव में हुआ था. उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से ही BSc. की पढ़ाई की थी. इसके बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए अजीत सिंह आईआईटी खड़गपुर चले गए. यहाँ से उन्होंने इंजीनियरिग की पढ़ाई की. अजीत सिंह ने इसके आगे की पढ़ाई के रूप में अमेरिका के इलिनाइस इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से मास्टर ऑफ साइंस किया.
अजीत सिंह के बारे में यह बात कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने अमेरिका में करीब 15 सालों तक नौकरी की थी. अजीत कंप्यूटर साइंटिस्ट के रूप में भी काम कर चुके थे. उन्होंने साल 1960 के दौरान IBM के साथ किया.
अजीत सिंह का परिवार (Ajit Singh family) :
अजीत सिंह के पिता का नाम चौधरी चरण सिंह था. स्व. चौधरी चरण सिंह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री थे. अजीत सिंह के पुत्र का नाम जयंत चौधरी है जो कि वर्तमान में मथुरा के सांसद हैं. अजीत सिंह की दो बेटियां भी हैं. अजीत सिंह की पत्नी का नाम राधिका सिंह है.
चौधरी अजीत सिंह का राजनैतिक करियर (Ajit Singh politics career) :
अजीत सिंह का नाम राजनीति के गलियारों में काफी सम्मान के साथ लिया जाता है. उनका नाम राजनीति से उस वक्त जुड़ा था जब उनके पिता और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का स्वस्थ कुछ ठीक नहीं चल रहा था. इसके बाद में अजीत सिंह को साल 1986 में राज्यसभा जाने का अवसर मिला.
अजीत सिंह ने यहां दो सालों तक लोकदल ए और जनता पार्टी के अध्यक्ष के रूप में काम किया. इसके बाद अजीत सिंह ने साल 1989 में पार्टी का विलय जनता दल में किया. वे इस पार्टी में महासचिव पद पर बने रहे.
अजीत सिंह बने बने केंद्रीय मंत्री (Ajit Singh as central minister) :
अजीत सिंह को साल 1989 में पहली बार बागपत से लोकसभा का चुनाव लड़ने का अवसर मिला. अजीत सिंह की मेहनत और उनकी लोकप्रियता के चकते उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की और लोकसभा पहुंचे. यहाँ से उनकी पहचान किसान नेता के रूप में बनी.
अजीत सिंह ने कई बार यहाँ से चुनाव भी लड़ा. इसके बाद अजीत सिंह साल 1991 में बागपत से ही लोकसभा पहुंचे. जबकि साल 1996 में अजीत सिंह कांग्रेस के टिकिट पर लोकसभा में काबिज हुए.
राष्ट्रीय लोकदल की स्थापना (Indian National Lok Dal):
अजीत सिंह ने साल 1997 में राष्ट्रीय लोकदल की स्थापना. इसके उपरांत वे साल 1997 के उपचुनाव में बागपत से जीते. हालाँकि साल 1998 में अजीत क चुनाव में हार का भी सामना करना पड़ा लेकिन साल 1999 में वे फिर से जीतकर लोकसभा पहुंचे.
अजीत सिंह, दिवंगत नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee) की सरकार में साल 2001 से 2003 मंत्री बने रहे. अजीत सिंह साल 2011 के दौरान यूपीए के साथ भी रहे. वे साल 2011 से लेकर 2014 मनमोहन सरकार में मंत्री पद पर रहे.
साल 2014 में उन्होंने चुनाव हारा और इसके बाद साल 2019 में भी उन्हें हार का ही सामना करना पड़ा.
चौधरी अजीत सिंह का निधन :
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र अजीत सिंह का निधन 6 मई 2021 को कोरोना संक्रमण के कारण हुआ.
