दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मैगजीन में से एक टाइम मैगजीन ने हाल ही में विश्व के 100 उभरते नेताओं की सूची जारी की है. इस सूचि में पांच भारतीय को भी जगह दी गई है. इन पांच भारतीयों में भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद का नाम भी शामिल है. टाइम मैगजीन ने चंद्रशेखर आजाद के बारे में लिखा है कि, ‘वो दलित समुदाय को गरीबी से उबारने के लिए शिक्षा को महत्व देते हैं और स्कूल भी चलाते हैं. वो आक्रामक हैं और बाइकों पर जातीय हिंसा के शिकार लोगों की रक्षा के मकसद से गांवों में जाते हैं. चंद्रशेखर आजाद का असली इम्तिहान 2022 में होने वाला है जब यूपी में विधानसभा के लिए चुनाव होंगे.’ बता दे कि चंद्रशेखर आजाद ने ‘आज़ाद समाज पार्टी’ नाम से एक राजनीतिक पार्टी भी बनाई है. तो चलिए जानते है कि चंद्रशेखर आजाद रावण कौन है? और वह अपने नाम के साथ रावण क्यों लगाते है.
चंद्रशेखर आजाद का परिवार
चंद्रशेखर आजाद का जन्म उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में चटमलपुर के पास घडकौली गांव में हुआ था. चंद्रशेखर के पिता का नाम गोवर्धन दास है और वह सरकारी स्कूल में प्रिसिंपल थे. चंद्रशेखर की माता का नाम कमलेश देवी है. चंद्रशेखर के परिवार में दो बहनें हैं. उनके दो भाई भी है. उनका दूसरा भाई पढ़ाई के साथ-साथ एक मेडिकल स्टोर पर नौकरी करता है. चंद्रशेखर खुद भी अविवाहित हैं.
पढ़ाई छोड़ बने दलित एक्टिविस्ट
चंद्रशेखर ने देहरादून के डीएवी कॉलेज से पढ़ाई की है. साल 2011 में चंद्रशेखर हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका जाना चाहते थे. लेकिन एक दिन अपने पिता के इलाज के दौरान चंद्रशेखर ने सहारनपुर के अस्पताल में दलितों पर हो रहे अत्याचारों की खबर पड़ी. बस यही समय था जब चंद्रशेखर ने अमेरिका जाने के विचार छोड़ दिया और दलित एक्टिविस्ट बनने का फैसला किया.
द ग्रेट चमार्स
दलितों के उत्थान के लिए काम कर रहे चंद्रशेखर पहली बार साल 2015 में सुर्ख़ियों में आए जब उन्होंने अपने गाँव के बाहर ‘द ग्रेट चमार’ का बोर्ड लगा दिया. उनके इस कदम से उनके गाँव में दलित और ठाकुर के बीच तनाव पैदा हो गया था. हालांकि यह बोर्ड आज भी उनके गाँव के बाहर लगा है.
साल 2017 में हुआ भीम आर्मी का उभार
तो चलिए अब हम जानते हैं कि भीम आर्मी क्या है? और भीम आर्मी की स्थापना कैसे हुई? तो बता दे कि साल 2011 में चंद्रशेखर ने अपने गाँव के कुछ युवाओं के साथ मिलकर भीम आर्मी बनाई. भीम आर्मी का पूरा नाम ‘भारत एकता मिशन’ है. आज भीम आर्मी दलित युवाओं का एक पसंदीदा संगठन बन गया है. बड़ी संख्या में दलित युवा भीम आर्मी में शामिल हो रहे हैं. भीम आर्मी सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में साल 2017 में हुआ. इसी साल सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों और सवर्णों के बीच हिंसा में भीम आर्मी का नाम उभरकर सामने आया. इस हिंसा के बाद चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया था. वैसे बता दे कि भीम आर्मी’के मूल संस्थापक छुटमलपुर निवासी एक दलित चिंतक सतीश कुमार हैं. इस आर्मी को उनके दिमाग की उपज बताया जाता है.
अपने नाम के साथ रावण क्यों लगाते हैं चंद्रशेखर
गौरतलब है कि चंद्रशेखर अपने नाम के साथ रावण लगाते हैं. चंद्रशेखर का मानना है कि रावण का नकारात्मक चित्रण किया गया है जबकि वह अपनी बहन शूर्पनखा के अपमान के कारण सीता को उठा लाता है लेकिन उनको भी सम्मान के साथ रखता है. यहीं कारण है कि वह अपने नाम के साथ रावण शब्द का प्रयोग करते हैं.
