June 10, 2021

Baba Ka Dhaba Story – लौट कर वापस ढाबे पर आए बाबा, पढ़िए कांता प्रसाद की पूरी कहानी

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद फेमस हुए बाबा का ढाबा (Baba ka Dhaba) के मालिक कांता प्रसाद (Kanta Prasad) एक बार फिर चर्चा में हैं. फेमस होने के बाद बाबा ने मालवीय नगर में एक नया रेस्टोरेंट खोला था, जो अब बंद हो चुका है. कांता प्रसाद एक बार फिर से मालवीय नगर स्थित ढाबे पर आ गए हैं. गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर ‘बाबा का ढाबा’ चलाने वाले कांता प्रसाद की दर्दभरी कहानी क्या वायरल हुई, उनके ढाबे पर खाना-खाने वालों के लाइन लग गई थी. बॉलीवुड सेलेब्रेटी, क्रिकेटर, नेता, यूटूबर्स और आम लोग ‘बाबा का ढाबा’ की मदद करने के लिए आगे और ‘बाबा का ढाबा’ चल निकला था. तो चलिए आज जानते है ‘बाबा का ढाबा’ के लोकप्रिय होने और उसे चलाने वाले कांता प्रसाद की कहानी.

1. गौरव वासन ने बनाया वीडियो

 ‘बाबा का ढाबा’ के लोकप्रिय होने की कहानी शुरू हुई  जब गौरव वासन नाम के youtuber ने सोशल मीडिया पर ‘बाबा का ढाबा’ और उसे चलाने वाले कांता प्रसाद का वीडियो अपलोड किया. इस वीडियो में कांता प्रसाद रोते हुए नजर आ रहे है. वीडियो में कांता प्रसाद ने बताया है कि लॉकडाउन के बाद उनके ढाबे पर बहुत कम लोग आ रहे हैं. इस कारण उनकी आमदनी बहुत कम हो गई है. उनका गुजारा करना मुश्किल हो गया है. अपने वीडियो के माध्यम से गौरव वासन ने लोगों से कांता प्रसाद की मदद करने की अपील की.

2. सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

कहते है जब हम बिना किसी स्वार्थ के किसी का भला करते है तो हमारा काम जरूर सफल होता है. ऐसा ही कुछ गौरव वासन के साथ भी हुआ. उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि उनके द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर इतना वायरल हो जाएगा. गौरव वासन द्वारा अपलोड किया हुआ वीडियो इतना वायरल हुआ कि रवीना टंडन, सुनील शेट्टी, स्वरा भास्कर, सोनम कपूर, क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन समेत तमाम हस्तियों ने लोगों से ‘बाबा का ढाबा’ चलाने वाले कांता प्रसाद की मदद करने के अपील की. इसका असर यह हुआ कि ‘बाबा का ढाबा’ पर ग्राहकों की भीड़ लग गई. लोग ‘बाबा का ढाबा’ पर खाना खाकर उनकी मदद करने लगे. यही नहीं बड़ी संख्या में देश भर से लोगों ने कांता प्रसाद को ऑनलाइन दान भी दिया. कई लोगों ने ‘बाबा का ढाबा’ पर आकर उन्हें आटा, दाल, चावल जैसी चीजें भी दान किया.

3. ‘बाबा का ढाबा’ कहां है

‘बाबा का ढाबा’ साउथ दिल्ली के मालवीय नगर की शिवालिक कॉलोनी में हनुमान मंदिर के सामने बी ब्लॉक में स्थित हैं. इस ढाबे पर चाय-नाश्ते से लेकर लंच तक मिलता है. ‘बाबा का ढाबा’ ग्राहकों की भीड़ देखकर कांता प्रसाद बहुत खुश हुए थे. कांता प्रसाद ने उस समय कहा था कि पहले ढाबे को कोई पूछता भी नहीं था और अब लगता है जैसे पूरा देश मेरे साथ खड़ा है.

4. ‘बाबा का ढाबा’ की शुरुआत

कांता प्रसाद ने उस समय अपने इंटरव्यू में कहा था कि उम्र 80 साल से ज्यादा है. मैं और मेरी पत्नी 1988 से ‘बाबा का ढाबा’ चला रहे हैं. मैं और मेरी पत्नी सुबह 6 बजे आकर ढाबा खोलते हैं और 9 बजे तक खाना तैयार कर देते हैं. बदामी सब्जियां काटती और मैं बनाता हूं. लॉकडाउन के बाद ढाबे की कमाई ना के बराबर होने लगी. अक्सर खाना बच जाता था, उसे ही घर ले जाकर खाते थे. कई बार राशन नहीं होने से भूखे ही सोना पड़ता था.

5. बच्चे नहीं करते हैं मदद

कांता प्रसाद के अनुसार उनके दो बेटे और एक बेटी है. उनके बेटे उनकी मदद नहीं करते हैं. बेटी की शादी हो गई है, लेकिन वह कांता प्रसाद के साथ ही रहती है. उनकी 12 साल की नातिन है उसे पढ़ाते भी हैं. ऐसे में जीवन बहुत कठिनाई से गुजर रहा था. हालांकि अब ढाबे पर लोग आने लगे है तो सब अच्छा हो गया है.

6. कांता प्रसाद की कहानी

अब बात करते हैं ‘बाबा का ढाबा’ चलाने वाले कांता प्रसाद की कहानी की. दरअसल कांता प्रसाद उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले है. कांता प्रसाद जब 5 साल के थे तभी उनकी शादी 3 साल की बादामी देवी से हो गई थी. कांता प्रसाद के अनुसार जब शादी में उन्हें नए कपड़े पहनाए जा रहे थे और शादी की रस्में हो रही थी तब उन्हें सब कुछ पिकनिक जैसा लग रहा था. हम दोनों साल में एक बार दोस्त की तरह मिलते थे. जब हम बड़े हुए तो हमें हमारे रिश्ते के बारे में पता चला. जब मैं 21 साल का हुआ तब मेरी पत्नी मेरे साथ रहने के लिए आई. हमारी दोस्ती मोहब्बत में बदल गई और तब से हम एक साथ ही जीते रहे.

7. बाबा का दूसरा ढाबा ‘रेस्टोरेंट’

पैसे आने के बाद बाबा ने मालवीय नगर में एक नया रेस्टोरेंट खोल लिया था. रेस्टोरेंट काफी अच्छा था और पहले ढाबे से काफी एडवांस भी था. बाबा ने यहाँ 2 शेफ और 1 स्पोर्टिंग स्टाफ भी अपने साथ काम करने के लिए रखा था, जो अब बंद हो चुका है. बाबा को सहायता के रूप में 40 लाख से ज्यादा रुपये मिले थे. बाबा ने बताया कि मासिक खर्च लगभग 1 लाख रुपये था, जबकि औसत मासिक बिक्री कभी 40,000 रुपये से अधिक नहीं हुई. इसलिए उन्हें अपना रेस्टोरेंट बंद करना पड़ा.

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