May 15, 2021

अपनी मेहनत से महिलाओं को एक नई पहचान दिला रही हैं इंटीरियर डिजाइनर अंकिता बैद

भारत काफी आधुनिक देश बना चुका है लेकिन महिलाओं के काम को लेकर आज भी लोगों की मानसिकता पूरी तरह नहीं बदली है. आज भी लोगों का नजरिया देश में काम करने वाली महिलाओं को लेकर स्पष्ट नहीं दिखाई देता है. वहीँ कुछ महिलाऐं ऐसी भी हैं जो इस जंजीर को तोड़कर आगे बढती हैं और अपना नया मुकाम हासिल करती हैं.

आज हम बात कर रहे हैं कोलकाता की इंटीरियर डिजाइनर अंकिता बैद के बारे में. अंकिता एक सक्सेसफुल बिज़नसवुमन हैं और अपना और अपने देश का नाम रोशन कर रही हैं. अंकिता का मानना है कि महिलाओं को भारत में भी अब वही स्थान मिलना चाहिए जो पुरुषों को दिया जाता है.

महिलाऐं पहले के मुकाबले अब पुरुष का कंधे से कंधा मिलकर हर क्षेत्र में साथ दे रही हैं. कई क्षेत्र ऐसे भी हैं जहाँ महिलाऐं पुरुषों को पीछे छोड़कर आगे भी बढ़ चुकी हैं. अंकिता कहती हैं वे सिंगापुर में रहकर आई हैं और वहां इस तरह का कोई भी भेदभाव स्त्री और पुरुष में नहीं किया जाता है.

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वे खुद भी मारवाड़ी परिवेश में ही पली बढ़ी हैं और उसके बाद सिंगापुर से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की है. अंकिता ने सिंगापुर से कोलकाता लौटने के बाद खुद  का इंटीरियर डिजाइनिंग का बिज़नस शुरू किया है. वे कहती हैं यहाँ आने के बाद उन्होंने पुरुषों और महिलाओं में होने वाले भेदभाव से जुडी कई स्थितियां देखी हैं.

उन्होंने यहाँ आने के बाद खुद की कंपनी बनाई और यहाँ की महिलाओं को काम भी दिया है. वे कहती हैं कि यह देखकर अच्छा लगता है कि महिलाऐं अब उनके कारण खुद की पहचान बना रही हैं.

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अंकिता ने अपना बिज़नस साल 2010 में स्थापित किया. इंटीरियर के क्षेत्र में अच्छा अनुभव हासिल करने के बाद अपनी कम्पनी Ark & Arts की शुरुआत करना और उसे आगे बढ़ाना अंकिता के लिए एक बड़ा सपना था. अंकिता ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर अपना खुद का कारोबार शुरू किया.

अंकिता इस बारे में कहती हैं कि उन्होंने अपनी कम्पनी में महिलाओं को स्थान दिया है और वे महिलाओं को आगे भी बढ़ा रही हैं. उनके इस काम में उनके परिवार ने काफी सहयोग किया. हालाँकि समाज में खुद का बिज़नस करने में और खुद का नाम बनाने के लिए अंकिता ने काफी मेहनत की.

अंकिता  ने साल 2010 से अपने काम को लगातार आगे बढाया है और अब एक अच्छे मुकाम पर पहुँच चुकी हैं. अंकिता महिलाओं के इस विकास को देखकर भी काफी खुश हैं. और समाज में फैली और पुरुष और स्त्री के भेदभाव की मानसिकता को मिटने का प्रयास कर रही हैं.

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