केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार बिना CAA के ही गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने जा रही है. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर मचे बवाल के बाद अब गृह मंत्रालय ने हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन मंगाए हैं. यह आवेदन गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा तथा पंजाब के 13 जिलों में रह रहे हिंदू, सिख, जैन और बौद्धों जैसे गैर मुस्लिम शरणार्थियों से मनवाएं गए है.
दोस्तों पिछले कुछ सालों में देश में जिन चीजों की सबसे ज्यादा चर्चा हुई है उनमें नागरिकता संशोधन एकता यानी CAA और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी NRC शामिल है। इन चीजों का देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध हुआ है। हालांकि बड़े पैमाने पर लोग इनके समर्थन में भी उतरे हैं। जहां एक तरफ कुछ लोग CAA और NRC को एक ही सिक्के के दो पहलू बता रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसका खंडन कर रहे हैं। हालांकि आज भी बड़ी संख्या में कई लोग ऐसे हैं जिन्हें CAA और NRC के बारे में जानकारी नहीं है। तो चलिए आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि CAA और NRC क्या है? CAA और NRC में क्या अंतर है? CAA और NRC का विरोध क्यों हो रहा है?
नागरिकता संशोधन एक्ट 2019 (CAA) क्या है? (Meaning of Citizenship Amendment Act)
नागरिकता संशोधन बिल यानी Citizenship Amendment Bill (CAB) को 9 नवंबर 2019 को लोकसभा में पास किया गया था। 12 दिसंबर को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन गया। इस तरह नागरिकता संशोधन बिल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद नागरिकता संशोधन कानून बन गया। इस कानून में भारत सरकार ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले 6 समुदायों के अवैध शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया है। जिन छह समुदायों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है, उनमें हिन्दू, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी और जैन शामिल हैं.
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नागरिकता संशोधन एक्ट का उद्देश्य Purpose of Citizenship Amendment Act
दरअसल इस कानून का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रह रहे ऐसे लोगों को भारत की नागरिकता देना है, जिनका वहां धर्म के आधार पर उत्पीड़न किया जा रहा है. इस कानून के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए अवैध शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. नागरिकता संशोधन एक्ट के आने से पहले किसी भी शरणार्थी को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था, लेकिन नागरिकता संशोधन एक्ट के बाद पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक अगर पांच साल भी भारत में रहे हों तो उन्हें नागरिकता दे दी जाएगी.
CAA का विरोध क्यों हो रहा है? Why is CAA opposing?
दरअसल नागरिकता संशोधन एक्ट में प्रावधान किया गया है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले 6 समुदायों के अवैध शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. इसमें पड़ोसी देशों के मुसलमानों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है. यहीं कारण है कि देश में बड़ी संख्या में लोग इसी आधार पर इस बिल का विरोध कर रहे हैं.
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राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) क्या है? (What is National Register of Citizenship)
राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) एक तरह से भारत में रहने वाले लोगों की सूचि है. इसे भारत में रह रहे अवैध घुसपैठियों की पहचान करने के लिए करने के लिए लाया गया है. सरकार चाहती है कि NRC को पूरे देश में लागू किया जाए. जिससे देश के नागरिकों की एक सूचि तैयार हो और घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाए. NRC को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर साल 2013 में शुरू किया गया था. फ़िलहाल देश में NRC की प्रकिया सिर्फ असम में चल रही है. NRC के अनुसार 25 मार्च 1971 से पहले से जो व्यक्ति या उनके पूर्वज असम में रह रहे हैं, उन्हें भारतीय नागरिक माना जाएगा.
राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर NRC का उद्देश्य क्या है? Purpose of NRC
दरअसल साल 1971 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ और बांग्लादेश का उदय हुआ, तब बड़ी संख्या में बंगलादेशी घुसपैठियों ने भारत में प्रवेश कर लिया. इनमें से ज्यादातर घुसपैठिये असम में रहने लगे. असम के नागरिकों का आरोप है कि बंगलादेशी घुसपैठियों के कारण उनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं. साथ ही बंगलादेशी घुसपैठियों के कारण राज्य में जुर्म भी बढ़ रहा है. ऐसे में इन्हें वापस इनके देश भेजा जाना चाहिए. असम में भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों की पहचान करने के उद्देश्य से ही NRC लाया गया है.
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NRC का विरोध क्यों हो रहा है? Why is NRC opposing?
सरकार ने कहा है कि NRC में सभी धर्मों और संप्रदायों के लोगों को शामिल किया जाएगा. लेकिन मुस्लिम संगठनों और नेताओं का दावा है कि NRC देश के उन लाखों मुस्लिम लोगों के लिए श्राप साबित होगा जो किसी कारण से अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेंगे. उनका आरोप है कि जब पूरे देश में NRC लागू किया जाएगा तो उनमें ज्यादातर मुस्लिम लोगों को ही बाहरी बताया जाएगा. इसके अलावा इसके विरोध में एक तर्क यह भी है कि NRC लागू करने के बाद गैर मुस्लिम घुसपैठियों को तो CAA के चलते भारत की नागरिकता मिल जाएगी, जिससे इसका असर सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लोगों पर पड़ेगा.
CAA और NRC में अंतर Difference between CAA and NRC
- CAA और NRC में सबसे बड़ा अंतर यह है कि CAA में धर्म के आधार पर लोगों को नागरिकता दी जाएगी जबकि NRC में धर्म को आधार नहीं बनाया गया है.
- NRC के जरिए विदेशी घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाएगा जबकि CAA के जरिए विदेशी घुसपैठियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी.
- NRC में उन लोगों को भारत का नागरिक माना जायेगा जो कि 24 मार्च, 1971 को या फिर इससे पहले से भारत के नागरिक हैं जबकि CAA में उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी जो कि दिसम्बर 31, 2014 को या इससे पहले भारत आये थे.
- NRC को लागू करने का मुख्य उद्देश्य बंगलादेशी घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें देश से बाहर करना है जबकि CAA का उद्देश्य पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के ऐसे अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता देना है, जिनका अपने देश में धर्म के आधार उत्पीड़न किया गया है.
- NRC को अभी केवल असम राज्य में लागू किया गया है जबकि CAA के प्रावधान पूरे देश में लागू होंगे.
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