What is Khalistan Movement? – दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम खालिस्तान (Khalistan), खालिस्तान आंदोलन (Khalistan Movement), खालिस्तान आंदोलन के इतिहास (History of Khalistan Movement) सहित अन्य चीजों के बारे में बात करेंगे. दोस्तों खालिस्तान एक ऐसा शब्द है जो हमें अक्सर सोशल मीडिया या टीवी डिबेट के दौरान सुनाई देता है. हमारे देश के दुश्मन हमारे देश को तोड़ने के लिए खालिस्तान आंदोलन चला रहे हैं. हमारे देश में कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें अब तक खालिस्तान आंदोलन और इसके इतिहास के बारे में पता नहीं है. तो चलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम इन्हीं सभी सवालों के जवाब जानेंगे.
खालिस्तान क्या है? (What is Khalistan?) और खालिस्तान का मतलब क्या है? (What is the meaning of Khalistan?)
दोस्तों खालिस्तान का मतलब होता है The Land Of Khalsa. अगर हिंदी में कहे तो इसका मतलब है खालसा के लिए एक अलग राष्ट्र या सिखों के लिए अलग राष्ट्र. खालसा का अर्थ होता है, प्योर यानी शुद्ध. 1940 में खालिस्तान का जिक्र पहली बार “खालिस्तान” नामक एक पुस्तिका में किया गया था.
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खालिस्तान आंदोलन क्या है? (What is Khalistan Movement?)
दरअसल साल 1947 में जब देश आजाद हुआ तो एक हिस्सा पाकिस्तान के नाम से नया देश बना। तभी कुछ सिख नेताओं ने अपने लिए अलग देश की मांग की, जिसे नाम दिया गया खालिस्तान। उन्हें लगा कि अलग देश की मांग करने का यह सबसे सही समय है। हालांकि भारत सरकार ने पंजाब को अलग देश बनाने की मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद पंजाबी भाषी लोगों के लिए एक अलग राज्य की मांग तेज हुई। इस मांग को लेकर ही अकाली दल का जन्म हुआ और कुछ ही समय में इसे पंजाब में समर्थन भी मिलने लगा। अकाली दल के नेतृत्व में पंजाब में जबरदस्त प्रदर्शन हुए।
साल 1966 में सरकार ने मानी बात
आख़िरकार साल 1966 में भारत सरकार ने जाब को अलग राज्य बनाने की मांग मान ली। साथ ही भाषा के आधार पर हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शाषित प्रदेश चंडीगढ़ की स्थापना हुई। अकाली दल चाहता था कि पंजाब की नदियों का पानी किसी भी हालत में हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को नहीं मिले, लेकिन सरकार ने उनकी यह मांग नहीं मानी।
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खालिस्तान आंदोलन का इतिहास
हालांकि पंजाब में खालिस्तान को अलग देश बनाने की मांग समय-समय पर उठती रही। 1980 के दशक में ‘खालिस्तान’ के तौर पर स्वायत्त राज्य की मांग जोर पकड़ने लगी। इसे खालिस्तान आंदोलन का नाम दिया गया। इस दौरान अकाली दम कमजोर होने लगी और ‘दमदमी टकसाल’ के जरनैल सिंह भिंडरावाला की लोकप्रियता बढ़ते लगी। इसके बाद पंजाब हिंसक घटनाओं का दौर शुरू हो गया।
डीआईजी अटवाल की हत्या
हिंसक घटनाओं के बीच खालिस्तान आंदोलन में अहम् मोड़ आया साल 1983 में। इस दौरान पंजाब के डीआईजी अटवाल की स्वर्ण मंदिर परिसर में ही हत्या कर दी गई। इसके बाद भिंडरावाला ने स्वर्ण मंदिर को अपना ठिकाना बना लिया। वह अपने सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों के साथ हमेशा घिरा रहता था। एक तरह से भिंडरावाला ने मंदिर को अपने किले में तब्दील कर दिया था। भिंडरवाला को स्वर्ण मंदिर से निकालने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘ऑपरेशन सनडाउन’ शुरू करने की योजना बनाई, इसके लिए बाकायदा 2000 कमांडों को ट्रेनिंग भी दी गई, लेकिन आम नागरिकों को नुकसान पहुंचने की आशंका से इस ऑपरेशन को नकार दिया गया।
ऑपरेशन ब्लू स्टार
आखिर में इस समस्या को खत्म करने के लिए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ को अंजाम दिया गया। इसके लिए साल 1984 में 1 से 3 जून तक पंजाब की रेल, रोड और एयर ट्रांसपोर्ट सर्विस को रोक दिया गया। स्वर्ण मंदिर में पानी और बिजली को रोक दिया गया। इसके बाद 6 जून को स्वर्ण मंदिर के अंदर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। भारी गोलीबारी के बाद जरनैल सिंह भिंडरवाला का शव बरामद कर लिया गया। 7 जून 1984 को स्वर्ण मंदिर पर भारतीय सेना का नियंत्रण हो गया।
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इंदिरा गाँधी की हत्या
ऑपरेशन ब्लू स्टार के कारण ही सिख समुदाय के लोगों के मन में इंदिरा गाँधी के प्रति नफरत पैदा हो गई। कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कई सिख नेताओं ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इस ऑपरेशन के महज चार महीने बाद ही 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही 2 सिख सुरक्षाकर्मियों ने कर दी थी।
जारी रहा खालिस्तान आंदोलन
भिंडरवाला की मौत के साथ ही खालिस्तान आंदोलन खत्म नहीं हुआ बल्कि इस मांग को लेकर कई छोटे-बड़े संगठन बने। भिंडरवाला की मौत का बदला लेने के लिए एक एक सिख राष्ट्रवादी ने 23 जून 1985 को एयर इंडिया के विमान में विस्फोट कर दिया, जिसमें 329 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 10 अगस्त 1986 को ऑपरेशन ब्लू स्टार को लीड करने वाले पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल एएस वैद्य की दो बाइक सवार बदमाशों ने हत्या कर दी थी। वहीं 31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय के पास बम विस्फोट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। ब्लास्ट में 15 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
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अब खालिस्तान आंदोलन का हाल
हालांकि अब पंजाब से खालिस्तान आंदोलन खत्म हो चुका है। लेकिन समय-समय पर पाकिस्तान सिखों को इसके लिए उकसाता रहता है। इसके अलावा कनाडा और यूरोप में बसे सिखों के कई संगठन भी सिखों को खालिस्तान बनाने के लिए उकसाते रहते हैं।
FAQ:-
Q – खालिस्तान कौन से देश में है?
A – दुनिया में खालिस्तान नाम से कोई जगह नहीं है. हालांकि एक संगठन ने साल 2021 में भारत का खालिस्तानी नक्शा जारी किया था, जिसमें न सिर्फ पंजाब बल्कि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान, उत्तर प्रदेश के कई जिलों को खालिस्तान का हिस्सा दिखाया गया था.
Q – खालिस्तान की राजधानी कौन सी है?
A – अलग खालिस्तान के मांग करने वाले एक नेता ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में लाहौर को खालिस्तान की राजधानी बनाने की मांग का समर्थन किया था.
Q – खालिस्तानी आतंकवादी कौन है?
A – ऐसे सभी लोग जो भारत के टुकड़े करना चाहते हैं और पंजाब सहित देश के अन्य हिस्सों को भारत से अलग करके खालिस्तान नाम से नया देश बनाना चाहते हैं, वह खालिस्तानी आतंकवादी है.
Q – सिख खालिस्तान क्यों चाहते हैं?
A – यह कहना गलत है कि सभी सिख खालिस्तान चाहते है. भारत की रक्षा में सिखों का गौरवमयी इतिहास रहा है. भारत में खालिस्तान के विचार को ज्यादातर सिखों ने नकार दिया है. हालांकि भारत को अस्थिर करने के लिए विदेशों में बैठे कुछ लोग खालिस्तान बनाने की मांग छेड़ते रहते है. वो भारत में सिखों को बदनाम करने और उन्हें गुमराह करने के लिए तरह तरह की साज़िश रचते हैं. उनका मकसद है कि भारत में अलग खालिस्तान की मांग को लेकर गृह युद्ध छिड़ जाए यह भारत के टुकड़े हो जाए.
Q – खालिस्तान की जनसंख्या कितनी है?
A – जैसा कि हमने आपको बताया है कि दुनिया में खालिस्तान नाम से कोई जगह नहीं है. खालिस्तान नाम का देश कुछ नापाक लोगों का नापाक सपना है.

gyan March 2, 2022 at 1:43 PM
November 1984 sikh nasal khushi bhi add kar lete or batate kitne bheguna sikho ko maragya