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May 14, 2018

मिलिए आयरन लेडी से, जो जिंदा लाश में जान भर दे ,ऐसी है इनकी प्रेरणादायक कहानी

मुनिबा मजारी जिन्हें की आज पाकिस्तान की आयरन लेडी कहा जाता है और वो संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की नेशनल एम्बेस्डर हैं। बता दे ब्रिटिश समाचार संस्था बीबीसी ने साल 2015 में उन्हें अपनी 100 वुमन सीरीज में शामिल किया था और फोर्ब्स पत्रिका ने साल 2016 में 30 साल से कम उम्र की दुनिया की 30 शख्सियतों में शुमार किया था। तीन मार्च 1987 को जन्मीं मुनिबा की कहानी किसी भी इंसान के लिए प्रेरणादायक है। हमारे समाज में जहाँ विकलांग या शारीरिक रूप से दुर्बल लोगों को एक कमज़ोरी का प्रतीक बना के दर्शाया जाता है, उनसे हमदर्दी की जाती है, वहीँ मुनिबा को ये बात हरगिज़ गवारा नहीं था। जिसके वजह से वो विकलांग होते हुए भी कुछ ऐसा कर दिखाया जिसके बारे में लोग केवल सपने देखते है और उसे पूरा करने के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा देते है फिर भी उन्हें वो सफलता नहीं मिल पाती।

बता दे मुनिबा का जन्म एक बलोच पुरिवार में हुआ था। मुनिबा का बचपन से ही एक पेंटर बनने का सपना था लेकिन उनका परिवार रूढ़िवादी किस्म का था। मुनिबा ने 18 साल की उम्र में अपने पिता के कहने पर खुद की इच्छा न होने के बावजूद भी शादी कर ली लेकिन उनकी शादीशुदा जिंदगी खुशहाल नहीं रही। शादी के दो-तीन साल बाद ही एक ऐसी दुर्घटना हो गयी जिसने मुनिबा की जिंदगी को ही बदल कर रख दिया।

मुनिबा ने बताया कि वे और उनका पति कहीं बाहर जा रहे थे तभी उनका पति कार चलाते हुए सो गया और गाड़ी के बेकाबू हो जाने के बाद वो खुद तो बाहर कूद गया लेकिन मुनिबा कार के अंदर ही रह गईं। इस एक्सीडेंट के बारे में मुनिबा खुद बताती है की जिस वक्त ये हादसा मेरे साथ हुआ उस वक्त “मेरे कलाई की हड्डी टूटी हुयी थी, कंधे की भी… और हॉस्पिटल जाते वक़्त ही मुझे एहसास था कि मेरा आधा शरीर टूट चुका है, और आधा शरीर लकवाग्रस्त हो चुका था जिसके बाद एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकने के बाद, कराची में एक हॉस्पिटल ने मेरी जांच की, वहां मैं ढाई महीने तक थी, जीने की कोई वजह नहीं थी, मेरे ३ बड़े और २ छोटे ऑपरेशन हुए”,

दुर्घटना में मुनिबा बुरी तरह घायल हुईं और पूरे ढाई महीनों तक अस्पताल में रहने के दौरान जब वो बाहर आईं तो पहले की तरह वो अपने पैरों पर खड़ी होने लायक नहीं थीं जिसके बाद डॉक्टर ने उन्हें बताया कि वो अब कभी माँ भी नहीं बन सकेंगी। मुनिबा पैरों के बेजान होने से ज्यादा अपने माँ न बन पाने की बात से दुखी हुईं।

मुनिबा अपने घर आई, तब भी उनके जीवन में कुछ सुधार कुछ नहीं हुआ था, बल्कि उन्हें बिस्तर से बाँध दिया गया था, और एक व्हील चेयर उनके हाँथों में सहारे के लिए थमा दिया गया था, लेकिन मुनिबा उन व्यक्तियों में से नहीं थी जो परिस्थितियों से हार मान कर उसे ही अपना जीवन बना ले बल्कि वे तो ये मानती थी की वो आज भी आजाद है उनका कहना था की “मैं निःसंदेह ये स्वीकारती हूँ कि मैं मेरे शरीर की वजह से कैद हूँ, पर मेरा मन आज़ाद है, और मेरी आत्मा भी, मैं अब भी बड़े सपने देख सकती हूँ…..”, उन्होंने ठान लिया था की की वह किसी पर निर्भर नहीं होंगी, अपनी ज़िन्दगी खुद की शर्तों पर जियेंगी। पर इस खूबसूरत महिला ने इस हादसे से अपने जज़्बे को टूटने नहीं दिया, और तब से आज तक का उनका विकास एक सफर जैसा है, जबकि उनका कद तकनीकी रूप से सीमित हो चुका है।आज वह पहली व्हील-चेयर से जुडी महिला कलाकार हैं।

विकलांग होने के बाद उनके पति ने उन्हें तलाक दे दिया जिसके बाद मुनिबा ने हौसला नहीं हारा बल्कि अपनी कला के जरिये वे अपनी भावनाओं को लोगो तक पहुँचाने में सफल हुई। धीरे-धीरे उनकी कला को पहचान मिलने लगी। मुनिबा मोटिवेशनल स्पीकर के तौर भी जानी जाती है। अब मुनिबा एक बेटे की माँ भी हैं। बता दे माँ न बन पाने की वजह से मुनिबा ने खुद को टूटने नहीं दिया बल्कि उन्होंने एक बच्चे को गोद भी ले लिया है और आज वो एक बच्चे की माँ भी है। आज उनकी कहानी उनकी जबानी सुनकर -निराश हताश लोगो के दिलों में आशा की नई किरण जाग जाती है।

मुनिबा का कहना था की विकलांग होना बिल्कुल भी दुर्बलता का प्रतीक नहीं है बल्कि वो तो ये कहती है की “हम भी इंसान हैं, हम भी आप की तरह सांस लेते हैं, हमें सहारे की ज़रूरत नहीं है, हम अपनी ज़िन्दगी खुद जीने के काबिल हैं, और हमें वह जीने दें”, मुनिबा टोनी&गाए जैसी कंपनी की ब्रांड एम्बेसडर बनी, और आज वे दुनिया की पहली व्हील-चेयर से जुड़ी, मॉडल हैं। और कुछ ही दिनों में, वे व्हील-चेयर से जुड़ी पहली टीवी संचालक भी बनने वाली हैं।और सबसे बड़ी बात तो ये है की मुनिबा अपनी इस स्थिति से बेहद खुश हैं। मुनिबा की सोच में सराहने वाली बात है, की उन्होंने अपनी कमज़ोरी को ही अपनी ताक़त बना ली है। उनकी हिम्मत और सकारात्मक चिंता को हमारा सलाम।

मुनिबा की कही ये बात बिलकुल ही सच लगती है की अपनी कमज़ोरी को ताक़त बनाने की कला आप सीख गये, तो आकाश आपकी मुट्ठी में है जियें, खुश रहें, हर पल का मज़ा उठाएं, और अपनी क्षमता को निखरने का मौका दें जिससे आप एक बेहतर इन्सान बन सकते हैं।

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