Who is Birubala Rabha in Hindi –
हमारे देश में आज भी कई मान्यताएं ऐसी हैं जिनके कारण महिलाओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इनमें चुड़ैल पर्थ और जादू-टोना जैसी चीजें भी शामिल हैं जिनका शिकार मासूम औरतों को होना पड़ता है. लेकिन कई समाजसेवी महिलाऐं ऐसी भी हैं इन कुरीतियों के खिलाफ लड़ रही हैं. इनमें से ही एक नाम है बिरुबाला राभा का, जिन्हें उनके कामों के चलते भारत सरकार ने साल 2021 में पद्मश्री अवार्ड (Padma Shri Birubala Rabha) से भी सम्मानित किया है.
बिरुबाला राभा एक समाज सुधारक के रूप में काम करती हैं और जादू टोना या चुड़ैल प्रथा की शिकार महिलाओं के अधिकारों के लिए लडती हैं. जिन महिलाओं को उनके परिवारवाले या समाज के लोग डायन या चुड़ैल कहकर घर से बाहर निकाल देते हैं या उनके साथ मारपीट करते हैं बिरुबाला राभा उनके विरुद्ध लड़ती और अभियान चलाती हैं.
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बिरुबाला राभा वैसे तो अपने काम के लिए काफी फेमस हैं लेकिन फिर भी कई ऐसी बातें हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं. तो चलिए हम बताते हैं आपको बिरुबाला राभा कौन हैं ? से लेकर बिरुबाला राभा की बायोग्राफी, बिरुबाला राभा का सोशल वर्क, बिरुबाला राभा की लाइफ स्टोरी (Birubala Rabha Life Story), बिरुबाला राभा की जीवनी आदि के बारे में.
कौन हैं बिरुबाला राभा ? Who is Birubala Rabha ?
बिरुबाला राभा एक सोशल वर्कर हैं और प्रताड़ित महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ती हैं. वे एक मिशन बिरुबाला नामक संस्था का भी संचालन करती हैं जहाँ से स्त्रियों को प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ जागरूकता फ़ैलाने का काम किया जाता है. भारत सरकार ने बिरुबाला राभा को उनके सहस और काम को देखते हुए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है.
बिरुबाला राभा की बायोग्राफी : Birubala Rabha Biography :
जब बिरुबाला राभा की उम्र महज 6 साल थी तब ही उनके पिता का देहांत हो गया और उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया. पिता के चले जाने के बाद बिरुबाला को अपने स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और उन्होंने अपनी माँ के साथ खेत में काम करना शुरू कर दिया.
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जब बिरुबाला राभा की उम्र 15 साल की हुई और उनकी माँ ने उनकी शादी (Birubala Rabha Marriage) एक किसान के साथ कर दी. शादी के बाद बिरुबाला ने कपडा बुनने का काम शुरू किया और अपने तीनों बच्चों का पालन-पोषण करने लगे.
साल 1980 की बात है जब उनके सबसे बड़े बेटे को टायफाइड बीमारी हो गई. इस बीमारी के बाद बिरुबाला अपने बच्चे को इलाज के लिए पास ही के एक नीम-हकीम के पास ले गईं. लेकिन यहाँ उन्हें यह कहा गया कि उनका बेटा नहीं जी पाएगा. हालाँकि बिरुबाला के प्रयासों के कारण उनका बेटा बच गया.
तब से बिरुबाला राभा ने यह बात ठान ली कि वे ऐसे नीम-हकीम जो लोगों को बेवकूफ बनाने का काम करते हैं और जो लोग जादू टोना करते हैं उनके खिलाफ आवाज़ उठाएंगी और अभियान चलाएंगी.
इसके साथ ही बिरुबाला ने यह भी देखा कि कई गांवों में महिलाओं को डायन या चुड़ैल बताया जाता है और उनकी हत्या कर दी जाती है. कई महिलाऐं ऐसी भी होती हैं जिनके साथ घरवाले मारपीट भी करते हैं और महिलाऐं उनके खिलाफ आवाज़ नहीं उठा पाती हैं.
बिरुबाला राभा ने अपने इरादों को पक्का किया और कुछ महिलाओं के साथ मिलकर एक ग्रुप बनाया. इस ग्रुप का काम महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाना है.
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‘मिशन बिरुबाला’ (Mission Birubala) नामक उनकी संस्था स्कूलों में जाती है और फिर बच्चों को डायन प्रथा के बारे में जानकारी देती है. साथ ही वे इन बच्चों को नीम-हकीम और जादू टोने से बचने के लिए भी जागरूक करते हैं.
बिरुबाला राभा ने मिशन बिरुबाला अपने अभियान के तहत करीब 42 महिलाओं की जान बचाई है. उनके इस काम के लिए ही असम विधानसभा के द्वारा एक डायन हत्या निषेध विधेयक भी पेश किया गया है. साथ ही बिरुबाला को साल 2018 में वुमंस वर्ल्ड समिट फाउंडेशन प्राइज भी दिया था.
महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने वाली बिरुबाला राभा को भारत सरकार ने साल 2021 में पद्मश्री अवार्ड (Birubala Rabha Padma Shri Award) से भी सम्मानित किया है.
