What is Chhath Puja in hindi –
दीपावली (Diwali) पर्व को हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है. इस त्यौहार को देशभर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह पर्व पांच दिनों का पर्व है लेकिन यह पर्व छठ तक चलता है. और इस छठे दिन को छठ पूजा के रूप में मनाया जाता है. छठ पूजा को खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में मनाया जाता है. यहाँ इस पर्व की रौनक देखते ही बनती है. छठ पूजा को एक महापर्व के रूप में मनाया जाता है जोकि कुल चार दिनों तक सेलिब्रेट किया जाता है.
छठ पूजा या छठ पर्व को लेकर यह कहा जाता है कि यह पर्व बिहारीयों का सबसे बड़ा त्यौहार है जिसे हम उनकी संस्कृति भी कह सकते हैं. इस पर्व को लेकर यह कहते हैं कि इसे पूरे देश में वैदिक काल से सेलिब्रेट किया जा रहा है. छठ पूजा को सूर्य, प्रकृति, पानी, हवा और छठी मइया को समर्पित बताया जाता है. इस पूजा की खास बात यह है कि इसमें कोई मूर्तिपूजा शामिल नहीं है बल्कि इसे देवताओं को जीवन देने के लिए शुभकामनाएं देने के तौर पर मनाया जाता है.
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छठ पूजा के बारे में कई ऐसी बातें हैं जिनके बारे में हम जानते हैं. लेकिन इसके अलावा कई बातें ऐसी भी हैं जिनसे हम अब तक अंजान हैं. जैसे छठ पूजा क्या है ? छठ पूजा क्यों मनाई जाती है ? छठ पूजा कब मनाई जाती हैं ? छठ पूजा से जुड़ी बातें, छठ पूजा कैसे मनाते हैं ? छठ पूजा का महत्व क्या है ? छठ पूजा की कहानिया आदि. तो चलिए जानते है छठ पूजा (Chhath Puja) के बारे में.
छठ पूजा की शुरुआत कैसे हुई ? (How did Chhath Puja start?)
बिहारियों के इस महापर्व के रूप में मनाए जाने वाले छठ पूजा पर्व से जुड़ी कई कहानियां हैं जोकि प्रचलित हैं. इन कहानियों की अलग-अलग मान्यताएं हैं और हर कहानी में लोगों का विश्वास है. हम आपको इनमें से कुछ कहानियां बताने जा रहे हैं. चलिए शुरू करते हैं.
पहली कहानी :
कहा जाता है कि राजा प्रियंवद की कोई संतान नहीं थी और इस कारण महर्षि कश्यप ने एक यज्ञ का आयोजन किया और प्रियंवद की पत्नी मालिनी को पुत्र की प्राप्ति के लिए आहुति के लिए बनी खीर दी. इस खीर से मालिनी को बेटा हुआ लेकिन वह मरा हुआ था. राजा उस बेटे को लेकर श्मशान गए और विलाप करने लगे और प्राण त्यागने की कोशिश करने लगे.
इसी समय वहां भगवान की मानस पुत्री देवसेना आईं और उन्होंने राजन से कहा कि वे सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से पैदा हुई हैं और इस कारण ही उन्हें षष्ठी कहा जाता है. राजा ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से देवी षष्ठी की व्रत किया और इस कारण ही उनके यहाँ पुत्र भी हुआ. तब से ही षष्ठी पूजा या छठ पूजा का आयोजन किया जाता है.
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दूसरी कहानी :
कहा यह भी जाता है कि जब श्रीराम और माता सीता अपने 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तब उन्होंने रावण के वध के पाप से मुक्ति के लिए राजसूर्य यज्ञ का आयोजन किया था और इसके लिए उन्होंने ऋषि मुग्दल को आमंत्रित किया था. ऋषि ने माता सीता पर गंगाजल छिड़का और उन्हें पवित्र किया. इसके साथ ही ऋषि ने आदेश दिया कि उन्हें कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करना होगी. जिसके बाद सीता जी ने ऋषि के आश्रम में छह दिनों तक भगवान सूर्यदेव की पूजा की. जिसके बाद छठ पूजा का पर्व मनाया जाने लगा.
तीसरी कहानी :
बताते हैं कि छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल के दौरान हुई थी जिसकी शुरुआत सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य पूजा के साथ की थी. वे घंटों तक कमर तक पानी में खड़े रहते थे और भगवान सूर्य की पूजा करते थे. इसी परम्परा को आज भी लोग मानते हैं और इस तरह से ही पूजा भी करते हैं.
चौथी कहानी :
कहा जाता है कि जब पांडवों ने अपना सारा राजपाठ जुए में खो दिया था तो इसके बाद ही दौपदी ने छठ व्रत रखा था. यह व्रत रखने और छठ पूजा करने से उनकी मनोकामना पूरी हुई और पांडवों को भी उनका राजपाठ वापस हासिल हुआ. इस कारण भी इस छठ पूजा को माना जाता है.
छठ पूजा का महत्व (Importance of Chhath Pooja) :
देशभर में छठ पूजा का काफी महत्व है. छठ पूजा को लेकर यह मान्यता है कि इस व्रत को विश्वास और श्रद्धा के साथ करने से निःसंतान औरतों को संतान की प्राप्ति होती है. देशभर में मनाया जाने वाला यह छठ पूजा का पर्व सूर्य, प्रकृति, जल और वायु को समर्पित है.
छठ पूजा को लेकर यह भी कहा जाता है कि जो कोई भी यह व्रत करता है उसके संतान के जीवन में तरक्की आती है. इसके साथ ही इस व्रत के करने से लोगों के जीवन में खुशहाली आती है और उनकी संतानों की रक्षा होती है. लोग अपने परिवार की रक्षा के लिए भी इस व्रत को रखते हैं.
वहीं कई विद्वानों का यह कहना है कि छठ पूजा व्रत का सैकड़ों यज्ञ आपको अधिक बल भी दे सकता है. और साथ ही आपके परिवार में सुख-समृद्धि भी आती है.
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छठ व्रत की पूजा विधि (worship method of chhath puja) :
कहा जाता है कि छठ भगवान सूर्य की बहन हैं और उनकी पूजा के लिए ही छठ पूजा को एक पर्व के रूप में मनाया जाता है. छठ माता को खुश करने के लिए लोग इस व्रत को रखते हैं और भगवान सूर्य की आराध्या करते हैं. इसके लिए लोग गंगा, यमुना या अन्य किसी भी नदी के किनारे जाते हैं और पूजा करते हैं. कहते हैं कि छठ पूजा में नदी में स्नान और सूर्य पूजा अनिवार्य है.
छठ पूजा के पहले दिन घर की सफाई होती है और चार दिनों तक शुद्ध शाकाहारी भोजन ही खाया जाता है. छठ पूजा के दूसरे दिन खरना कार्यक्रम का आयोजन होता है. तीसरे दिन में भगवान सूर्य को संध्या अर्घ्य देते हैं और चौथे दिन उदियमान सूर्य को उषा अर्घ्य दिया जाता है.
छठ पूजा का व्रत करना काफी शुभ और मंगलकारी माना जाता है. कहते हैं कि पूरे विधि विधान के साथ इस व्रत को करने से व्यक्ति को सुख और साधन की प्राप्ति होती और साथ ही निःसंतान स्त्रियों को संतान मिलती है.
