चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara), भारतीय क्रिकेट टीम का एक ऐसा नाम जिसने अपने खेल से खुद की एक खास पहचान बनाई है। वे एक इंडियन टेस्ट क्रिकेट प्लेयर हैं और अपनी शांत, रक्षात्मक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने कई फॉर्मेट में अपने खेल का प्रदर्शन किया है और दर्शकों का दिल जीता है। घरेलू क्रिकेट में वे सौराष्ट्र की ओर से खेलते हैं जबकि आईपीएल (IPL) की बात करें तो वे रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम का हिस्सा रहे हैं।
चेतेश्वर पुजारा का टेस्ट क्रिकेट करियर : डेब्यू और शुरुआती रिकॉर्ड
चेतेश्वर पुजारा का टेस्ट क्रिकेट (Cheteshwar Pujara test cricket) में डेब्यू साल 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक घरेलू श्रृंखला के दूसरे टेस्ट मैच के दौरान हुआ था। इस मैच में वीवीएस लक्ष्मण की जगह पर चेतेश्वर को मौका दिया गया था। अपने पहले ही मैच में वे केवल 3 गेंदों पर एक चौका लगाकर आउट हो गए थे, लेकिन उन्होंने अपनी काबिलियत का असली प्रदर्शन चौथी पारी में किया।
चेतेश्वर पुजारा का नाम ऐसे प्लेयर्स की लिस्ट में भी शामिल है जिन्होंने अपने पहले ही मैच में चौथी पारी के दौरान अर्धशतक बनाया। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में दो दोहरे शतक भी लगाए हैं, जो उनकी मजबूत बल्लेबाजी का सबूत हैं।
आज के इस आर्टिकल में हम चेतेश्वर पुजारा की बायोग्राफी, चेतेश्वर पुजारा का क्रिकेट करियर, चेतेश्वर पुजारा की फैमिली और हाल की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बात करेंगे। तो चलिए जानते हैं चेतेश्वर पुजारा की लाइफ स्टोरी:
Cheteshwar Pujara Biography, Cheteshwar Pujara cricket career, Cheteshwar Pujara family, Cheteshwar Pujara life story etc.
Suresh Raina Biography – कश्मीरी पंडित है सुरेश रैना, जानिए परिवार व क्रिकेट करियर के बारे में
चेतेश्वर पुजारा का जन्म और परिवार (Cheteshwar Pujara date of birth and family):
चेतेश्वर पुजारा का पूरा नाम चेतेश्वर अरविंद पुजारा (Cheteshwar Arvind Pujara) है। उनका जन्म 25 जनवरी 1988 को गुजरात के राजकोट में हुआ था। उनके पिता, अरविंद पुजारा, भी एक रणजी खिलाड़ी रह चुके हैं और उन्होंने सौराष्ट्र की टीम से खेला था। उनकी मां का नाम रानी पुजारा था।
चेतेश्वर की मां रानी पुजारा को कैंसर की बीमारी थी और उनका सपना अपने बेटे को एक सफल क्रिकेटर बनते देखना था। पुजारा अब अपने खेल से उस सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। जब चेतेश्वर साल 2005 में अंडर-19 का मैच खेलने गए थे, तो उन्हें यह दुखद खबर मिली कि उनकी मां अब नहीं रहीं। उस समय से ही चेतेश्वर पुजारा ने इस खेल को एक पूजा की तरह देखा है।
इंडियन क्रिकेटर चेतेश्वर अपनी मां को लेकर यह कहते हैं कि उनकी मां रानी पुजारा की दुआएं ही उनकी सफलता के पीछे हैं। उनकी मां हमेशा से उन्हें भारत के लिए खेलते हुए देखना चाहती थीं, लेकिन जिस दिन वे देश के लिए खेले थे, उस दिन उनकी मां इस दुनिया में नहीं थीं। वहीं, अपने पिता अरविंद को लेकर वे कहते हैं कि वे बेहद ही अनुशासित कोच हैं और आज भी फ़ोन पर उनके मैचों के बारे में चर्चा करते हैं।
Rahul Dravid Biography – क्रिकेट की दीवार के नाम से जाने जाते हैं राहुल द्रविड़
चेतेश्वर पुजारा का क्रिकेट करियर (Cheteshwar Pujara Cricket Career):
पुजारा ने काफी कम उम्र में ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। उन्हें क्रिकेट का काफी शौक भी है। उन्होंने छोटी उम्र में ही अंडर-14 टीम में एक तिहरा शतक लगाया था। इसके बाद अंडर-19 में इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए चेतेश्वर ने एक दोहरा शतक लगाकर अपना नाम बनाया था।
साल 2005 में अपना क्रिकेट करियर शुरू करने के एक साल बाद ही उन्हें एक बड़ा ब्रेक मिला। चेतेश्वर पुजारा ने अंडर-19 वर्ल्ड कप (Under-19 World Cup) खेला और इस दौरान 350 रन बनाए। पुजारा ने ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ बनकर न केवल खुद का नाम बनाया बल्कि अपनी काबिलियत को भी साबित किया।
इसके बाद चेतेश्वर पुजारा ने मैच के क्वार्टर फाइनल में 97 रनों का योगदान दिया और सेमीफाइनल में 129 रन (नाबाद) बनाए। उनके इस योगदान के चलते ही भारत ने 234 रनों के बड़े अंतर के साथ यह मैच अपने नाम किया।
चेतेश्वर पुजारा का टेस्ट मैच में डेब्यू साल 2010 के दौरान हुआ था। जबकि साल 2011 में बीसीसीआई के द्वारा पुजारा को ‘सी-ग्रेड नेशनल कॉन्ट्रैक्ट’ से सम्मानित किया गया। इसके बाद साल 2012 के अगस्त माह में चेतेश्वर ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में वापसी की और नवंबर महीने में फिर से दोहरा शतक जड़ा।
साल 2012 में चेतेश्वर पुजारा एनकेपी साल्वे चैलेंजर ट्रॉफी में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी भी बने थे। इस दौरान उनके नाम 2 शतक और 1 अर्धशतक बनाने का रिकॉर्ड था। मार्च 2013 में खिलाड़ी ने फिर से एक दोहरा शतक बनाया और इस कारण ही उन्हें ‘मैन ऑफ द मैच’ से सम्मानित किया गया।
चेतेश्वर पुजारा का खेल करियर काफी शानदार रहा है, उन्होंने कई मौकों पर अपने खेल का प्रदर्शन कर सभी को चौंकाया भी है तो कभी निराश भी किया है।
Deepak Chahar Biography – ग्रेग चैपल ने दी थी क्रिकेट छोड़ने की सलाह, अपनी मेहनत से दीपक चाहर…
युवा खिलाड़ियों को देते हैं फ्री में क्रिकेट की ट्रेनिंग (Free training in Cheteshwar Pujara Cricket Academy):
चेतेश्वर पुजारा के पिता अरविंद और अंकल बिपिन एक क्रिकेट अकादमी भी चलाते हैं जिसका नाम चेतेश्वर पुजारा क्रिकेट अकादमी (Cheteshwar Pujara Cricket Academy) है। यह अकादमी गुजरात के राजकोट से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित है। इस अकादमी की खास बात यह है कि यहाँ युवा खिलाड़ियों को फ्री में क्रिकेट की ट्रेनिंग (Free Cricket Training) दी जाती है। यहाँ तक कि अकादमी के लिए चयन किए गए खिलाड़ियों को घर से लाने और ले जाने के लिए भी फ्री सर्विस है।
चेतेश्वर पुजारा क्रिकेट अकादमी में क्रिकेट ट्रेनिंग के लिए सभी तरह की व्यवस्थाएं की गई हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं: 70 गज की बाउंड्री, 5 टर्फ पिच, 4 टर्न पिच फॉर नेट प्रैक्टिस, 2 सीमेंट पिच, बॉलिंग मशीन, फिटनेस एंड एक्सरसाइज मशीन आदि।
हालिया प्रदर्शन और भारतीय टीम में स्थिति
टीम से बाहर होना : 2023 के बाद से, पुजारा भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं हैं। खराब फॉर्म और कुछ अहम मैचों में रन न बना पाने के कारण उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था।
काउंटी और घरेलू क्रिकेट पर ध्यान : टीम से बाहर होने के बाद, पुजारा ने वापसी के लिए रणजी ट्रॉफी और इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित किया है। वे लगातार ससेक्स टीम के लिए रन बना रहे हैं और कई शतक भी लगा चुके हैं।
WTC फाइनल : ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, जिसके बाद उन्हें वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम में जगह नहीं मिली थी।
कमबैक का प्रयास : भले ही वे अभी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा न हों, पर पुजारा ने वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी है। उनकी धीमी और धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी शैली आज भी उनकी पहचान है, और वे लगातार रन बनाकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने का प्रयास कर रहे हैं।
‘दीवार’ जिसने कभी हार नहीं मानी
चेतेश्वर पुजारा का करियर उन युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा है जो धैर्य, अनुशासन और कड़ी मेहनत के बल पर सफल होना चाहते हैं। भारतीय टीम में उनका योगदान अतुलनीय है, खासकर विदेशी पिचों पर जहां उन्होंने अपनी ठोस बल्लेबाजी से कई मैच बचाए और जिताए हैं। भले ही वे आज टीम का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन उनका संघर्ष जारी है और वे अपनी ‘दीवार’ वाली पहचान को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनका सफर दिखाता है कि अगर आप अपनी काबिलियत पर विश्वास रखें और मेहनत करते रहें तो सफलता मिलना तय है।
