March 3, 2021

किन्नर भी बने छत्तीसगढ़ पुलिस का हिस्सा, समाज की मानसिकता से परे अब संभालेंगे स्टेट की कमांड

हेलो दोस्तों ! हमारे देश में थर्ड जेंडर या ट्रांसजेंडर को लेकर लोगों की अलग-अलग मानसिकता देखने को मिलती है. कहीं ट्रांसजेंडर को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता है तो कहीं हम उन्हें अच्छा भी मानते हैं. देश के न्यायालय भी थर्ड जेंडर को लेकर सम्मान और समान अधिकार देने को लेकर कई बार राय पेश कर चुके हैं. ऐसे में ट्रांस से जुड़ी एक और अच्छी खबर छत्तीसगढ़ से सामने आई है. दरअसल यहां छत्तीसगढ़ पुलिस में 15 किन्नरों का सिलेक्शन किया गया है. चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से :

हाल ही में छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए आरक्षक भर्ती के नतीजे रिलीज़ किए गए हैं. इसके अंतर्गत कुल 2259 पदों पर स्टेट से लोगों का चयन किया गया है. दिलचस्प बात यह है कि ऐसा पहली बार इस स्टेट में हुआ है कि छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम में अब थर्ड जेंडर भी शामिल हो रहा है. राज्य के 15 किन्नरों का सिलेक्शन भी इसके अंतर्गत हो चुका है जो छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है. साथ ही छत्तीसगढ़ देश का ऐसा पहला राज्य भी बन गया है जहां इतनी अधिक संख्या में थर्ड जेंडर पर्सन पुलिस में शामिल हो रहे हैं.

सबसे पहले हम बात करते हैं रायपुर (छत्तीसगढ़) की रहने वाली विद्या राजपूत के बारे में. विद्या बीते कई सालों से अपने समुदाय यानि थर्ड जेंडर के राइट्स के लिए काम करती हैं. वे हमेशा से ही अपने अच्छे कामों से चर्चा का विषय बनी रहती हैं. जैसे ही आरक्षक भर्ती के नतीजे सामने आए तो विद्या ने अपने साथियों का नाम भी इस लिस्ट में पाया. वे इस रिजल्ट से खुश होने के साथ ही हैरान भी थीं. इसलिए क्योंकि हमेशा से पीछे छोड़ दी जाने वाले इस वर्ग ने पुलिस टीम में अपना स्थान काबिज किया.

ऐसी ही एक कहानी है शबूरी की. शबूरी इस बारे में बात करते हुए बताती हैं कि, ‘पुलिस के लिए खाकी गौरवशाली यूनिफॉर्म है लेकिन मेरे लिए यह उससे भी अधिक सम्मान की बात है. वे कहती हैं, वे बचपन से ही लड़कों से अलग थीं. जिसके चलते सभी उनका मजाक भी उड़ाते थे और गलियां देते थे. लेकिन मैंने देखा है कि सभी पुलिस का सम्मान करते हैं और उनसे डरते भी हैं.

साल 2017 में हमें यह पता चला कि अब हम भी पुलिस में भर्ती हो सकते हैं. इसके बाद से ही हमने ट्रेनिंग शुरू कर दी और मैदान में जाना भी शुरू कर दिया. यह सफ़र शुरुआत में काफी कठिन रहा लेकिन धीरे-धीरे हम इसके लिए तैयार हो गए. जैसे ही हमारा सिलेक्शन हुआ तो हमें बहुत ख़ुशी हुई. हम जिस सम्मान के लिए हमेशा से तरसते रहे वो सम्मान हमें पुलिस की वर्दी के रूप में मिला.

अपने सिलेक्शन के बारे में एक किन्नर शिवन्या का कहना है कि, घर में शुरू से ही पैसों की काफी तंगी थी, जिसके कारण वे आसपास के घरों में झाड़ू-पोछे का काम करती थीं. वे जब लड़कियों की तरह रहती थीं तो उन्हें काम से निकालने का दबाव बनाया. इसके बाद स्कूल में भी उन्होंने कई समस्याओं का सामना किया. कई लोग तो उन्हें मामू तो कभी किन्नर कहकर चिड़ाते थे. आखिरकार मैंने भी मेहनत करने की सोची और अपनी मजिल को अपना बनाया.

दिप्शा इस मामले में कहती हैं, लड़के मेरे कपड़ो को लेकर मुझे चिढाते थे. मैं भी अक्सर यह सोचती थी कि भगवान ने मुझे भी नार्मल लाइफ क्यों नहीं दी. मैंने कई बार खुद की लाइफ को खत्म करने की भी कोशिश की. आखिर में मैं विद्या जी के सम्पर्क में आई और उन्होंने मुझे यह बात समझाई की मुझे खुद को स्वीकार करना होगा. घरवाले भी मुझे यह कहते थे कि लोगों का मुंह बंद करना है तो खुद को साबित करना होगा. मैंने खुद को मोटिवेट किया और सफलता को हासिल किया.

तो दोस्तों आपको किन्नरों का पुलिस टीम में शामिल होना कैसा लगा हमें कमेंट्स के माध्यम से जरुर बताइए.

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